भव्यतापूर्ण माहौल में‘पथगामिनी’ का पंचम वार्षिकोत्सव संपन्न
उपस्थित नामचीन साहित्यकारो ने अपनी रचनाओं से इस वार्षिकोत्सव को अत्यंत यादगार बना दिया।
दिल्ली (मुक्तिदीप) शाहदरा के महाराजा सूरजमल मार्ग स्थित ईस्ट एंड क्लब में साहित्य, शिक्षा, समाज और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय संस्था ‘पथगामिनी’ का पंचम वार्षिकोत्सव दिनांक 27 सितम्बर 26 (रविवार) को उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
माँ सरस्वती के सम्मुख दीप प्रज्वलन के दौरान शास्त्रीय नृत्य एवं वंदना के माध्यम से आयोजन का आरंभ हुआ। कार्यक्रम तीन सत्रों में विभाजित रहा।
प्रथम सत्र में एक महत्वपूर्ण विषय “शिक्षा व्यवस्था वर्तमान और भविष्य” पर सार्थक चर्चा की गई। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के प्रथम सत्र की अध्यक्षता गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविध्यालय के एजुकेशन डायरेक्टर एवं सत्र के प्रमुख वक्ता डॉ. एस.पी. सिंह ने की। युवा वक्ता डॉ. विशाल पाण्डेय का उद्बोधन बहुत ही प्रभावशाली रहा।
अपने उद्बोधन के दौरान उन्होने रेखांकित किया कि सूचना की प्रचुरता अपने आप में शिक्षा नहीं वरन सूचना को विवेकपूर्ण ढंग से परख कर समझ विकसित करना ही शिक्षा का उद्देश्य है। उन्होने समान पाठ्यक्रम होते हुए भी भिन्न-भिन्न भौगोलिक एवं सामाजिक परस्थितियों के प्रभाव में उत्पन्न होने वाली असमानता का जिक्र किया। डॉ. सविता चड्ढा ने अपने वक्तव्य के दौरान विध्यालयों में उपलब्ध संसाधनों कि गुणवत्ता के महत्व को रेखांकित किया। द्वितीय सत्र के दौरान कविता पाठ का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) मधु चतुर्वेदी की अध्यक्षता में इस सत्र में कवि-कवयित्रियों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को काव्यमय बना दिया।
सारस्वत अतिथि हरियाणा गौरव डॉ. सविता चड्ढा रहीं। इस दौरान प्रमुखत: डॉ. मधु चतुर्वेदी, डॉ. सविता चड्ढा, निधि कुमार झा, राजेश श्रीवास्तव, लवकेश चौधरी, प्रवीण कुमार, वीणा अग्रवाल, मनोज कामदेव, शुभ्र पालीवाल, उषा श्रीवास्तव, संगीता वर्मा, सुकृति श्रीवास्तव, मैत्रेयी, बबली सिन्हा ‘वान्या’, ईशा भारद्वाज, संगीता वर्मा, प्रेरणा, ऋतु अग्रवाल तथा दीपक ‘नीलपद्म’ ने काव्य पाठ प्रस्तुत किए। डॉ. सविता चड्ढा ने अपने दोहों से लोगों को वाह-वाह कहने पर मजबूर कर दिया। उनके एक संवेदनात्मक दोहे ने खास ध्यान आकर्षित किया ‘डगमग चलते पुत्र को, माँ उँगली पकड़ाये, अब डगमग माता चले, पुत्र कहाँ है हाय’। डॉ. मधु चतुर्वेदी ने भी अपने दोहे, मुक्तक, गजल, गीत आदि से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
तृतीय सत्र के दौरान मुशायरे का आयोजन किया गया जिसे प्रख्यात शायर अनिमेष शर्मा ‘आतिश’ की सदारत में प्रख्यात शायर खुर्रम नूर, अरविंद असर, शुश्रुत पंत ‘जर्रा’, पूनम माटिया, सोनिया अक्स सोनम, कविता प्रभा आदि ने अपनी गजलों से कार्यक्रम को परवान चढ़ा कर महफिल को लूट लिया। खुर्रम नूर जी की गजल ‘बहुत कुछ था हो पचा नहीं, कि ज़िंदगी हाजमोला नहीं’ को पसंद किया गया तो वहीं पूनम माटिया कि गजल ‘ये माना कि दूर है मंज़िल पर मुझे तो सागर तक जाना है और अरविंद असर जी की नए प्रयोग की गजल बेहद सराहीं गईं। ‘पकड़ कर फिर बहा दीं हैं समंदर में मछलियाँ मैंने’ गजल पढ़कर सत्र के सादर अनिमेष शर्मा ‘आतिश’ ने महफ़िल को इसके उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया।
इस अवसर पर पत्रकारिता क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्यो के लिए मुक्तिदीप समाचार पत्र के सम्पादक श्री शकील अहमद, मुख्य संपादक मनस्वी वाणी, श्री ओम गुप्ता, संपादक (डिजिटल मीडिया) करंट क्राइम, श्री निजाम अली, श्री ओम प्रकाश प्रजापति, संपादक ट्रू मीडिया को स्मृति चिन्ह व शाल देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र के दौरान पथगामिनी की पाँच वर्षों की यात्रा को प्रदर्शित करने के लिए एक लघु फिल्म भी दिखाई गई जिसे देवकृष्ण गुप्ता द्वारा संपादित किया गया। प्रथम सत्र के दौरान ही डॉ. ज्ञान चंद मिश्रा के काव्य-संग्रह ‘समय के स्वर’ का लोकार्पण भी हुआ। कार्यक्रम के प्रथम सत्र का सधा हुआ उत्कृष्ट संचालन कर निधि कुमार झा ने ध्यान आकर्षित किया तो वहीं आगे के दोनों सत्रों का कुशल संचालन डॉ. उषा श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यक्रम में ‘पथगामिनी’ की ओर से मंजुला श्रीवास्तवा, शुभ्रा पालीवाल, सोनिया सोनम ‘अक्स’, दीपक कुमार श्रीवास्तव, बीनू सिंह, अम्बिका मनोज जायसवाल, एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। संस्थापिका एवं अध्यक्ष मंजुला श्रीवास्तवा ने अपने उद्वोधन के दौरान कहा कि ‘पथगामिनी’ साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ शिक्षा और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर निरंतर सार्थक संवाद स्थापित करने हेतु सतत प्रयासरत है और पंचम वार्षिकोत्सव भी उसी कड़ी का एक आयोजन है।
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