लेखक हबीब सैफ़ी की किताब का विमोचन, हबीब साहब का बाल साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान: डॉ हाफ़िज़ कर्नाटकी
दिल्ली (मुक्तिदीप) जामा मस्जिद के नजदीक पहाड़ी इमली वाली स्थित दिल्ली यूथ वेल्फेयर एसोसिएशन के अंतर्गत संचालित शाह वली उल्लाह पब्लिक लाइब्रेरी में "21 वीं सदी में दिल्ली में उर्दू अदब ए अतफाल का इरतिक़ा" नामक पुस्तक का लोकार्पण सौ से अधिक पुस्तकों के लेखक और साहित्य अकादमी पुरस्कार विजेता हाफ़िज़ कर्नाटकी ने किया वहीं उनके सम्मान में साहित्यिक सत्र का आयोजन भी किया गया।
संस्था डाईवा के पदाधिकारियों जिनमें सिकंदर मिर्ज़ा चंगेज़ी, नायब सदर मोहम्मद तकी सैफी, तंज़ीम रज़ा, शरीफ़ कुरैशी आदि ने सभी मेहमानों का इस्तकबाल किया।
डॉक्टर अमीर हम्ज़ा ने लाईब्रेरी में उपस्थित लोगों से मुख्य अतिथि हाफ़िज़ कर्नाटकी साहब का परिचय कराया और आपके बाल साहित्य योगदान के बारे में जानकारी दी।
अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. हाफ़िज़ कर्नाटकी ने कहा कि यह मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता का विषय है कि मैं दर्जनों बार दिल्ली आया हूँ, लेकिन मुझे कभी भी पुरानी दिल्ली की संकरी गलियों में छिपे अनमोल ख़ज़ानों तक पहुँचने का अवसर नहीं मिला। इसके लिए मैं आप सभी ज़िम्मेदार लोगों का आभारी हूँ कि शाह वलीउल्लाह लाईब्रेरी जैसा ऐतिहासिक साहित्यिक केंद्र मेरे लिए उपलब्ध है। आप सभी की तरह इसका सेवक बनना मेरी हार्दिक इच्छा है, अतः पुस्तकालय के साथ आंशिक सहयोग करना मेरा कर्तव्य है।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर उन्होंने कहा कि डॉ. हबीब सैफ़ी उन प्रतिभाशाली लेखकों में से हैं जो बाल साहित्य के प्रति पूर्णतः समर्पित हैं। यह पुस्तक देश में बाल साहित्य के लेखन का एक विस्तृत विवरण प्रस्तुत करती है। मैं सभी भाग लेने वाले लेखकों का परिचय देता हूँ। हबीब सैफी कहानियाँ, कविताएँ, पहेलियाँ लिखते हैं और शोध एवं आलोचनात्मक कार्य भी करते हैं, जिसका स्पष्ट प्रमाण उनकी यह नवीनतम पुस्तक है, जो दस्तावेजी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही, इस पुस्तक में जिन लेखकों की लेखन प्रतिभा का प्रदर्शन किया गया है, वे अपने-अपने क्षेत्र में अद्वितीय और विख्यात हैं, जिसके लिए मैं डॉ. हबीब सैफ़ी और उनके साथी लेखकों को बधाई देता हूँ।
हबीब सैफी ने कहा कि मैं भाग्यशाली हूं कि मेरी पुस्तक का विमोचन हाफिज कर्नाटक जैसे विद्वान व्यक्तित्व द्वारा किया गया।
इससे पहले, मोहम्मद तक़ी सैफी व साथियों द्वारा अध्यक्ष व मुख्यअतिथि डॉ हाफ़िज़ कर्नाटकी साहब को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया और पुस्तकालय से प्रकाशन सामग्री भी प्रदान की गई। सिकंदर मिर्ज़ा चंगेज़ी ने पवित्र कुरान की सबसे पुरानी पांडुलिपि, मुंशी नवल किशोर द्वारा चित्रों सहित श्रीमद् भगवत गीता की मुद्रित प्रति और रज़ा कुरैशी संगठन द्वारा स्वर्ण युग की अन्य रचनाओं से परिचित कराया गया।
उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों द्वारका में मुस्लिम इत्तेहाद कमेटी के सेक्रेटरी इरफ़ान राही और उनके साथी रियाज़ अंसारी द्वारा उर्दू अकादमी दिल्ली के सहयोग से आयोजित सेमिनार का आयोजन किया गया था जिसमें 10 लेखकों द्वारा उपरोक्त विषय पर अपने मकाले पढ़े थे उन्हीं शोध-पत्रों के संग्रह की यह पुस्तक डॉ हबीब सैफ़ी ने तरतीब दी है और बाल साहित्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है
इस अवसर पर बाल साहित्य के रचनाकारों में ताहा नसीम, इरफान राही, इंजीनियर जरीफ अहमद, डॉ. अमीर हम्ज़ा ,मुहम्मद तकी, डाईवा के सदस्य सिकंदर मिर्ज़ा चंगेजी, तंज़ीम रजा, मुहम्मद शरीफ कुरैशी, हाफिज अब्दुल मस्जिद, अबू लैस, डॉ.आमिर रजा और मुहम्मद राशिद मौजूद रहे अंत में संस्था द्वारा ज़ायकेदार डिनर का एहतमाम भी किया गया। मुहम्मद तकी सैफ़ी ने सभी मेहमानों का शुक्रिया अदा किया।
रिपोर्ट: इरफ़ान राही
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