जाटव समाज मे मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों को बंद करने के लिए महापंचायत।

वक्ताओं ने मृत्यु भोज बन्द करने का पुरजोर समर्थन किया।

◆ रणवीर गौतम

मुरादनगर (मुक्तिदीप) आज कुंहेड़ा गांव में जाटव समाज की हुई महापंचायत में मृत्यु भोज जैसी समाजिक कुरीतियों के विरुद्ध चर्चा हुई। बैठक में दूर-दूर से आये अनेको वरिष्ठ अधिकारी, जनसेवक एवं राजनीतिक लोगो ने भाग लिया।

महापंचायत की शुरुआत करते हुए डॉक्टर रामकिशोर गौतम ने विस्तार के साथ यह जानकारी दी कि मृत्यु भोज जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करना किस लिए आवश्यक है. इसके बाद समाजसेवी मनोज भारती ने मृत्यु भोज को बंद करने का समर्थन करते हुए अपनी बात कही. बाद में इंस्पेक्टर चरण सिंह,चांदकिशोर, लोकेश जाटव, रोहताश जाटव, रामकिशन प्रधान, मामराज प्रधान, टीका राम, मदनपाल भारती, सत्येंद्र सरना, प्रधानाचार्य ओमप्रकाश, संत अमल दास, संजय जाटव, डॉ मुकेश कुमार, डॉक्टर सचिन कुमार, सुरेंद्र शेट्टी आदि अन्य कई वक्ताओं ने मृत्यु भोज बंद करने के समर्थन में अपने विचार व्यक्त किये।

महापंचायत को संबोधित करते हुए रामकिशन प्रधान, मोदीनगर नगर पालिका के पूर्व सभासद विनोद गौतम ने विस्तार से अपनी बात रखते हुए इस बात की जानकारी दी कि बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने इन कुरीतियों का जमकर विरोध किया था. उन्होंने यह भी कहा कि यदि हम अंबेडकर वाद को मानते हैं तो फिर इनको कुरीतियों को छोड़ना होगा. विनोद गौतम ने तथागत से लेकर बाबा साहब तक के अनेक उदाहरण दिए जहां इन कुरीतियों का विरोध किया गया है.

पीडबल्यूडी मैं अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात सुनील सागर ने मृत्यू भोज को लेकर राजनीतिक, सामाजिक आध्यात्मिक और धार्मिक पहलुओं को समेटते हुए कहा कि जाटव समाज का बड़ा तबका अभी विकास की उस सीढ़ी तक नहीं पहुंचा है जहां वह यह बात कह सके कि मैं आज अपने आप में संपूर्ण हूं. उन्होंने कहा कि इसके लिए आवश्यक है कि हम जाटव समाज के लोग अनावश्यक कुरीतियों से दूर रहें. उन्होंने मृत्यु भोज को खत्म करने का समर्थन किया.

विनोद प्रधान ने बोलते हुए कहां कि हम अपने जिन पूर्वजो का मृत्यु भोज करते हैं, उनका कर्ज हम कभी भी नहीं उतार सकते, यहां तक कि मृत्यु भोज करके भी हम उनका कर्ज नहीं उतार सकते. उन्होंने महापंचायत के दौरान यह संकल्प भी लिया कि अभी मृत्यु भोज में जाएंगे भी तो दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देकर चले आएंगे, वहां खाएंगे कुछ भी नहीं.

300 के लगभग लोगों की उपस्थिति वाली इस महापंचायत में गिनती के 10 लोगों को छोड़कर सभी इस बात के समर्थन में थे कि मृत्यु भोज बंद कर दिया जाए.

महापंचायत में बबली जाटव, महेश मुखिया, चमनसिंह चौधरी, धर्मवीर सिंह, ओमवीर गौतम, मुकेश बडका, रणवीर गौतम, बृजपाल प्रधान, डा. ब्रह्मदत्त, लखनऊ से आये इंजीनियर बृजेश कुमार व ललित कुमार, सतवीर राणा, अनिल गौतम,जगमोहन फौजी, जगबीर सिंह, बलराज, सूरजपाल सिंह, सतपाल सिंह, नरेंद्र कुमार सोंदा, रविंद्र कुमार, राम अवतार, विजय प्रताप, भीम सिंह,महिपाल सिंह, धर्मवीर सिंह,चंद्रभान, राजेंद्र कुमार, अमन सिंह,नरेश चंद्र,महेंद्र सिंह गौतम, तेजपाल सिंह, मेघराज सिंह, मुकेश कुमार, नरेंद्र लाला,संजय सुठारी, समय सिंह, जगपाल सिंह,राम मेहर, खेमचंद,प्रेमचंद,देवी सिंह, बालेश्वर,जय भगवान, विजेंद्र कुमार, प्रदीप कुमार,बाबूराम,हरपाल सिंह, तेजपाल सिंह, प्रेम दत्त,कंचन सिंह, दिनेश कुमार,जबर सिंह,रतिराम,सोनू भारती, कृष्ण कुमार,रामकुमार भारती, चंद्रपाल, वरुण,सुनील,सोनू प्रधान,मोनू बीडीसी,राहुल कुमार,नरेंद्र कुमार,तेजपाल,राजवीर,राजेंद्र कुमार, हरभजन, बिट्टू प्रधान,राकेश कुमार, जय भगवान,मदनपाल सिंह, राजकुमार भारती,डॉक्टर मुकेश कुमार,सोनपाल, राजपाल,विजय जाटव, कुलदीप कर्दम,संजय गौतम, सुरेंद्र जॉनी जाटव,धनपत सिंह प्रधान, किरण पाल, देशराज,दीपक कुमार, सुरेंद्र शेट्टी,सतवीर राणा,भूपेंद्र गौतम, शिवकुमार, सत्येंद्र सरना,आदि लोगों ने महापंचायत में भाग लिया.

महापंचायत का महत्वपूर्ण फैसला यह रहा कि मौजूद लोगों में से बहुमत ही नहीं बल्कि गिनती के कुछ लोगों को छोड़कर अधिकांश लोग मृत्यु भोज बंद करने के समर्थन में रहे. जाटव समाज में आ रही जागरूकता का यह ऐसा उदाहरण है जो भविष्य में कई नए प्रतिमान गढेगा.

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