अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान की काव्य संध्या में कवियों ने खूब तालियां बटोरी।
उठो बंधु सूरज आया है चलो, नहा लें खुली धूप में ….वेद शर्मा वेद
गाज़ियाबाद (मुक्तिदीप) रविवार को अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान के द्वारा शरद ऋतु एवं वरिष्ठ गीतकार डॉ. धनंजय सिंह के जन्मदिन के उपलक्ष्य में एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।
गोष्ठी में आये नामचीन कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से शरद ऋतु के सौंदर्य व महत्व को दर्शाते हुए काव्य पाठ किया। गोष्ठी की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कवि एवं आलोचक वेद शर्मा वेद ने की, उन्होंने अपने अंदाज में एक दोहा कुछ यूँ पढ़ा: बस इतनी सी बात पर, देखो हुआ बवाल।
पीले को पीला कहा, सूरज हो गया लाल।
वरिष्ठ गीतकार डॉ. धनंजय सिंह के गोल्फ लिंक सोसायटी स्थित आवास पर हुई इस काव्य गोष्ठी की शुरुआत डॉ रमेश कुमार भदौरिया की सरस्वती वंदना के साथ हुई। इसके बाद हापुड़ से पधारी वरिष्ठ कवयित्री कमलेश त्रिवेदी फ़र्रूख़ाबादी ने शरद ऋतु पर मोहक गीत सुनाए। वरिष्ठ कवि सोमदत्त शर्मा ने अपने दोहों के माध्यम से शरद ऋतु के सौंदर्य का वर्णन कुछ इस तरह किया-
ऋतु ने अब बेटा जना, 'शरद' रखा है नाम।
किलकारी से गूंजता, अपना सारा गाम।।
ठुम्मक ठुम्मक घूमता, किलक भरे, गिर जाय।
शरद हमारे बीच यूँ, पल पल रूप दिखाय।।
रजनी से बोली हवा, हलका सा कुछ ओढ़।
सिहरन सी बढ़ने लगी, वस्त्र पुराने छोड़।।
नोएडा से आए गीतकार विनय विक्रम ‘मनकही’ ने अपने गीत का मुखड़ा कुछ यूँ पढ़ा-
अमलतास ने पायल पहनी, सम्मोहन के दीप जले।
प्रीतपुष्प में लाली रचने, मेहँदी लेकर गीत चले।।
गोष्ठी का संचालन करते हुए एडवोकेट कवि प्रवीण कुमार ने अपनी कविताओं से भी खूब वाह-वाही लूटी।उनकी पतझड़ व हरसिंगार कविताएँ पसंद की गयी।वरिष्ठ गीतकार डॉ रमेश कुमार भदौरिया ने वर्तमान युग की सच्चाई कुछ यूं बयां की-
मन के कुरुक्षेत्र में देखो सतत चल रहा युद्ध।
सदाचार क्या दुराचार, क्या अशुद्ध क्या शुद्ध।।
वरिष्ठ गीतकार डॉ. धनंजय सिंह ने अपने चिरपरिचित अंदाज में अपनी रचनाओं से खूब रंग जमाया।कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रहे वरिष्ठ कवि व संपादक अरुण चंद्र राय ने अलग रंग की रचनाएं सुनाई।
उन्होंने पढा-
मेरे कैनवास पर
बने इस चित्र का यह
असमानुपातिक मानव
कर रहा है हासिल
ज्ञान विज्ञान कला के क्षेत्र में
तरह तरह की उपलब्धियां
लोग पसंद कर रहे हैं इसे
विभिन्न गैलरियों में
पूछ हो गई है इसकी
लिया जा रहा है इसका साक्षात्कार।
इसी क्रम में रुड़की से पधारे घनश्याम बादल ने बुद्ध की मनोदशा का बड़ा ही मर्मस्पर्शी वर्णन करते हुए एक गीत सुनाया। इस अवसर पर गणमान्यों ने डॉ. धनंजय सिंह को जन्मदिन बुके व पुस्तकें भेट कर बधाई दी, व उनके शतायु व स्वस्थ जीवन की कामना की।
इस अवसर पर सर्व श्री मृगेंद्र चतुर्वेदी मकरंद, अवधेश सिंह, डॉ तारा गुप्ता, विपिन जैन, दीपक श्रीवास्तव, रजनीकांत शुक्ल एवं राजीव सिंघल ने भी सुंदर गीत, ग़ज़ल व कविताएँ प्रस्तुत की।
काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार व संपादक अशोक मिश्र, मधु सिंह, जगेश त्यागी, व शकील अहमद देवेंद्र सिंह आदि सुधी श्रोता भी उपस्थित रहे।
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