पीलीभीत मतदाता सूची प्रकरण के बाद चुनाव आयुक्त को इस्तीफा दे देना चाहिये: भाकपा

लखनऊ (मुक्तिदीप) भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कहा कि उत्तर प्रदेश क़े पीलीभीत विधान सभा क्षेत्र की मतदाता सूची में 13 हजार से अधिक मतदाताओं के नामों में हेरा फेरी के गम्भीर खुलासे के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार का एक पल भी पद पर बने रहना बेहद आपत्तिजनक है। प्रधानमंत्री को अब उनसे तत्काल इस्तीफा ले लेना चाहिये।

हमारा सवाल प्रधानमंत्री से इसलिये है कि उन्होने ही श्री ज्ञानेश कुमार को देश के ऊपर थोपा है, और उन्होने ही कानून में बदलाव कर चुनाव आयुक्त को अजर- अमर बनाया है.

प्रेस को जारी एक प्रेस बयान में भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डा. गिरीश ने कहा कि शर्मनाक वोट चोरी, अवैध SIR के बाद अब उत्तर प्रदेश में विधान सभा क्षेत्रवार हेरा फेरी के खुलासे क़े बाद कटघरे में सीधे सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। पर उनके खिलाफ कोई कार्यवाही करने के बजाय पूरी सरकार और समूची भाजपा उनके बचाव में जुटी है। उलटे चुनाव आयुक्त को बचाने के लिये छोटी मछलियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है। पीलीभीत प्रकरण मॆं भी कई छोटे अफसर- कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही की गयी है। इससे न चुनाव आयोग और न ही सरकार जिम्मेदारी से बच सकती है।

भाकपा ने सवाल उठाया कि सत्ता परिवर्तन की बात को अवैधानिक बताने वाली भाजपा और उसकी सरकार तीस साल तक सत्ता में बने रहने की बात कर रही है तो क्या यह दावा चुनाव आयोग की धांधलियों क़े बल पर किया जा रहा है? और क्या यह दावा अपने आप में संविधानविरोधी और अलोकतांत्रिक नहीं है?

भाकपा ने कहा कि चुनावों मे बडे पैमाने पर धांधली के खुलासे के बाद यह साफ हो गया है कि भाजपा और आर एस एस का लोकतंत्र और संविधान पर कोई विश्वास नहीं है। इसलिये वह लोकतांत्रिक आंदोलनों को तानाशाही पूर्ण तरीकों सें कुचल रही है।

लेकिन लोकतंत्र बचाने की यह मुहिम दमन से रुकने वाली नहीं, भाकपा और विपक्ष इसका लोकतांत्रिक तरीके से माकूल जबाव देंगे। उपरोक्त सवालों पर जनता के बीच पनप रहा आक्रोश 01 नवम्बर को दिल्ली में होने जा रही इंडिया ब्लाक की रैली में देखने को मिलेगा।

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