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साहित्य उपवन रचनाकार के मंच से "अनमोल कला : हॅंसते रहो -हॅंसाते रहो" का भव्य विमोचन व यादगार कवि सम्मेलन



नोएडा (मुक्तिदीप ) साहित्य जगत के लिए 19 जुलाई का दिन अत्यंत गरिमामयी रहा, जब 'साहित्य उपवन रचनाकार' के तत्वावधान में नोएडा स्थित नमामि भारत रेस्टोरेंट में प्रख्यात कवि सुरेश चंद्र की बहु प्रतीक्षित कृति "अनमोल कला : हॅंसते रहो ,हॅंसाते रहो" का भव्य विमोचन समारोह और एक यादगार कवि- सम्मेलन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का कुशल संयोजन और संचालन साहित्य उपवन रचनाकार के संस्थापक अध्यक्ष रोहित रोज ने किया। समारोह की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार भगवती प्रसाद ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में ओजस्वी कवि डॉ. अनिल बाजपेई की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. निवेदिता शर्मा, श्रीमती वंदना कुंवर रायजादा, डॉ. आर.डी. गौतम 'विनम्र' एवं डॉ. मनोज 'अबोध' मौजूद रहे। वहीं सारस्वत अतिथि के रूप में प्रवीण व्यास ने मंच की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और डॉ. निवेदिता शर्मा द्वारा प्रस्तुत मधुर सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को साहित्यिक रंग में रंग दिया।


पुस्तक पर विस्तृत चर्चा करते हुए श्रीमती वंदना कुंवर रायजादा ने इसे एक अनमोल कृति बताया और अपनी बेहतरीन ग़ज़ल से श्रोताओं को मंत्र- मुग्ध कर दिया। इसके बाद शुरू हुए कवि सम्मेलन में कवियों ने एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं। डॉ. मनोज अबोध के दोहों और ग़ज़ल ने जहाँ खूब तालियां बटोरीं, वहीं प्रवीण व्यास की दमदार प्रस्तुति और मकबूल शायर एहतराम सिद्दीकी के अशआरों ने महफिल में जान डाल दी। कवयित्री डॉ. निवेदिता शर्मा के गीत ने समां बांधा तो डॉ. आर.डी. गौतम के मुक्तकों एवं मधुर गीत ने सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। मुख्य अतिथि डॉ. अनिल बाजपेई की ओजस्वी कविताओं का जादू श्रोताओं के सिर चढ़कर बोला। इस दौरान संयोजक डॉ. रोहित रोज के मुक्तकों और गीत ने भी खूब वाहवाही लूटी। कवि जोगेंद्र सिंह, रजनीकांत निडर और कवयित्री पूजा रवि चौहान ने अपनी कविताओं के माध्यम से मंच को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। कवि सुरेश चंद्र ने अपनी हास्य रस से सराबोर कविताओं से सभी का मन मोह लिया। अपने प्रसिद्ध कविता मां की ममता के कुछ अंश सुनकर मंत्र मुग्ध कर दिया।

अध्यक्षीय वक्तव्य में भगवती प्रसाद ने सभी को अभिभूत कर दिया। साहित्य उपवन रचनाकार द्वारा सुरेश चंद्र को 'अनमोल कला काव्य भूषण' सम्मान से अलंकृत किया गया और अन्य सभी रचनाकारों को अंग वस्त्र, मोतियों की माला व उपहार देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सुरेश चंद्र की धर्मपत्नी निशा चंद्र, सुपुत्री सोनल चंद्र, प्रीति शिवहरे, राकेश कुमार सक्सेना, डॉ. राजेश भास्कर, मुरारी वत्स, नेहा चतुर्वेदी, विजेंदर चतुर्वेदी, राजेश शर्मा, श्रीमती चंद्रकांता, नीरज सिंह, शिशिर पाठक, डॉ. राजेश भास्कर, रविन्द्र चौहान, स्तुति कुमारी, नेहा एवं मधुलिका झा सहित लगभग पचास साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में डॉ. रोहित रोज ने सभी आगंतुकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।

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