सरकारी उपेक्षा का शिकार बढ़ापुर इंटर कॉलेज! एक टीचर-एक प्रिंसीपल व एक बाबू के भरोसे चल रही है 600 छात्राओं की पढ़ाई


बिजनौर (मुक्तिदीप) जनपद के कस्बा बढ़ापुर स्तिथ गवर्नमेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज का सनसनीखेज मामला सामने आया है। 600 की संख्या में छात्राओं वाले इंटर कॉलेज में पिछले कई वर्षों से शिक्षक ही नहीं है। स्कूल की प्रधानाचार्या द्वारा इस सम्बंध में अनेकों बार पत्र लिखकर शासन से टीचर्स की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि इस इंटर कॉलेज में किसी समय 1200 से अधिक स्टूडेंट्स पढ़ते थे।

बिजनौर के बढ़ापुर में गवर्नमेंट गर्ल्स इंटर कॉलेज जो तीन एकड़ भूमि में बना हुआ है अब कुछ साल पहले यहां 1200 छात्राएं थी लेकिन अब मात्र 600 के आस पास ही रह गई हैं. कारण शिक्षा में निजीकरण के बढ़ते कदम, स्टॉफ की कमी, जिस कॉलेज में कम से कम दो दर्जन टीचर्स होनी चाहिए थी वहां मात्र दो टीचर्स पर 600 बच्चों को शिक्षा देने की जिम्मेवारी हैं उनमें भी अंजू मैडम प्रिंसिपल हैं ओर दूसरी प्रीति, प्रीति जी मटेर्निटी लीव पर हैं। शेष काम दस टीचर जो पी टी ए के तहत रखी हुई हैं, इन्हें भी तीन चार माह से पगार नहीं मिली हैं


प्रिंसिपल अंजू बताती हैं बीस टीचर के लिए शासन को कई बार लिखा गया लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ एकाध टीचर आ भी गईं तो कुछ माह बाद ट्रांफर ले लेती हैं। पढाई कक्षा आठ तक तो फ्री हैं लेकिन नो, दस, ग्यारह, बारह क्लास के बच्चों से साढ़े चार सौ पीटीए फीस वसूली जाती हैं कॉलेज का लेखा जोखा रखने के लिए मात्र एक बाबू है जो कि आउट सोर्स पर रखा हुआ है। बाकि सब कुछ राम भरोसे है।

बढ़ापुर नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष व इस समाचार के लेखक कॉमरेड शराफ़त हुसैन लिखते है कि योगी मोदी की डबल इंजन की सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देती है। इलेक्शन को देखते हुए योगी महाराज महिलाओं को पचास हज़ार देने की घोषणा करेंगे, रोड वेज़ की बसों में फ्री में सफर भी कराएँगे, लेकिन बच्चियों को पढ़ाएंगे नहीं. उप्र साठ के दशक में इन पंक्तियों के लेखक ने खुद पाँचवी तक तालिम यहीं से हासिल की, उस वक्त ये बड़े मंदिर की धर्मशाला में चला करता था. सरकार लड़कियों की शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं है. हाँ भवन के लिए ग्रांट जरूर आ जाती है. अभी कॉलेज में ऑडिटोरियम बना है,लैब है लेकिन साइंस पढ़ाने वाला कोई नहीं है. इधर निजी स्कूल जमकर कोर्स, ड्रेस, टूशन फीस के नाम पर लूट मचाकर चांदी काट रहे है।


(बढ़ापुर से पूर्व चेयरमैन शराफत हुसैन की मुक्ति दीप के लिए विशेष रिपोर्ट)

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