अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा बढ़ापुर का "जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय" आजादी के 80 साल, लेकिन फिर भी शिक्षा का स्तर शून्य


बिजनौर (मुक्तिदीप) बढ़ापुर स्थित जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय 60 वर्षों की गौरवशाली शैक्षिक विरासत हजारों विद्यार्थियों के अतीत की अमूल्य शैक्षिक धरोहर का नाम बढ़ापुर या आस पास के सैकड़ों गांवों में अत्यंत सम्मान के साथ लिया जाता है।

लेकिन अब हालात इसके उलट है कभी एक कक्षा में कई कई सेक्शन में बंटे रहने वाला यह विद्यालय आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है सुस्त मैनेजमेंट गुणवत्ता पूर्वक शिक्षा का ना होना और विद्यालयों की प्रतिस्पर्धी दौड़ में अपने स्कूल को शामिल न करना इस विद्यालय के पिछड़ेपन का मुख्य कारण है शिक्षा विभाग की सुस्त और लचर कार्य प्रणाली के चलते पांचवी क्लास तक मान्यता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 8 व इंटर तक की कक्षाएं संचालित किए जाने के चलते कस्बे में शिक्षा की गुणवत्ता अपने निचले पायदान पर है जिससे चलते कस्बे के छात्रों और आने वाले पीढ़ी का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है

जिस संस्थान को हम जनता स्कूल के नाम से जानते हैं, उसकी स्थापना सन 1965 में "जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय" के रूप में की गई थी।

अभिलेखों के अनुसार यह विद्यालय सन 1965 से प्राथमिक विद्यालय के रूप में संचालित था लेकिन सन 1992 में इस विद्यालय को हाईस्कूल की मान्यता प्राप्त हुई यद्यपि विद्यालय में उपलब्ध छात्र अभिलेख 1965 से सुरक्षित हैं जो इसकी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को प्रमाणित करते हैं। छः दशकों से भी अधिक समय से यह संस्थान शिक्षा का प्रकाश फैलाते हुए हजारों विद्यार्थियों को ज्ञान, अनुशासन और संस्कार प्रदान कर चुका है। इसकी इमारत हरा भरा मैदान और पुरानी कक्षाएँ आज भी उस दौर की यादें संजोए हुए हैं, जब शिक्षा को समाज निर्माण का सबसे बड़ा माध्यम माना जाता था। बढ़ापुर और आस पास के सैकड़ों गांवों के अनेको प्रशासनिक अधिकारी शिक्षक जनप्रतिनिधि और समाजसेवी इसी शिक्षण संस्थान की देन हैं यह केवल एक विद्यालय नहीं हैं बल्कि इस क्षेत्र की शैक्षिक विरासत और गौरव का प्रतीक रहा है।

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