जीडीए के निशाने पर आए आरडीसी के व्यावसायिक बेसमेंट तय अवधि के बाद भी धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं व्यावसायिक गतिविधियां


◆ आलोक यात्री

ग़ाज़ियाबाद (मुक्तिदीप) आरडीसी (राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर) ग़ाज़ियाबाद का कनॉट प्लेस कहा जाता है। लेकिन इन दिनों इसकी हालत चांदनी चौक से भी बदतर है। वजह है अधिकांश इलाके में अतिक्रमण और वाहनों की भरमार। बीते महीने लखनऊ में एक इमारत में आग लगने से दस लोगों की मौत के बाद आवासीय संपत्तियों में भू-उपयोग के विपरीत व्यावसायिक गतिविधियों पर एक बार फिर प्रश्नचिन्ह लग गया है। उक्त इमारत में मानकों के विपरीत बेसमेंट से लेकर चौथी मंजिल तक बिना रोक-टोक व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से चल रही थी। अग्नि कांड से हुई मौत के बाद पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। जिसके बाद सरकार द्वारा ठोस कदम उठाते हुए ऐसी गतिविधियों का संज्ञान लेने और इनके विपरीत निर्णायक कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। समझा जाता है उसी के क्रम में राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर से अवैध रूप से संचालित व्यावसायिक गतिविधियों का संज्ञान लिया गया है।

गौरतलब है कि राजनगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर के अधिकांश भूखंड मिश्रित भू-उपयोग की श्रेणी में आते हैं। ग़ाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण आवंटियों को व्यावसायिक और आवासीय उपयोग की अनुमति देता है। इसके अलावा आरडीसी के मिश्रित भूखंड स्वामियों को कुछ फीसदी बेसमेंट निर्माण की अनुमति भी प्रदान की जाती है। लेकिन अधिकांश प्रकरणों में भूखंड स्वामियों ने अनुमति के विपरीत सौ फीसदी बेसमेंट का निर्माण कर लिया है। निसंदेह नियम विरुद्ध निर्माण प्राधिकरण के अफसरों की मिलीभगत के बिना असंभव है। हाल ही में प्राधिकरण के जोन-3 में आने वाले आरडीसी के भवन उपयोग के संबंध में यह तथ्य भी सामने आया है कि बेसमेंट का उपयोग महज गोदाम के रूप में मान्य है। प्राधिकरण आरडीसी स्थित बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति प्रदान नहीं करता है। लिहाजा लखनऊ अग्निकांड के बाद प्राधिकरण द्वारा अपने दायरे में चल रही ऐसी गतिविधियां चिन्हित करने के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि आरडीसी की अधिकांश इमारतों में बेसमेंट का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के तौर पर हो रहा है।

ए, बी, सी और डी ब्लॉक में बंटे आरडीसी में लगभग 200 इमारतों के बेसमेंट में रेस्टोरेंट, कोचिंग सेंटर, कपड़े, कंप्यूटर्स व मोबाइल के शोरूम, शराब की दुकान, रीयल एस्टेट के ऑफिस, जेंट्स लेडीज सैलून, चार्टर अकाउंटेंट्स व डॉक्टर्स के ऑफिस व क्लिनिक, बैंक लॉकर्स व स्टेशनरी मार्ट जैसी व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से संचालित हैं। लखनऊ अग्निकांड के बाद हरकत में आए प्राधिकरण ने इलाके की एक एक इमारत में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों का स्थल सर्वे किया। जिसके बाद बेसमेंट में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों पर तत्काल अंकुश लगाने का निर्णय लेते हुए संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर दिया गया। विशेष कार्याधिकारी द्वारा जारी नोटिस में चेतावनी दी गई है कि भवन के बेसमेंट में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने के साथ भवन का शमन मानचित्र भी संबंधित अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। नोटिस में बेसमेंट में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को एक सप्ताह के भीतर बंद करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई थी कि निर्देश का अनुपालन न करने की दशा में निर्माण के विरुद्ध सील या ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।

समाचार लिखे जाने तक चेतावनी के एक माह बाद भी आरडीसी के अधिकांश बेसमेंट में व्यावसायिक गतिविधियां धड़ल्ले से जारी हैं। गौरतलब है कि प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नंदलाल कलाल ने सचिव व अभियंत्रण टीम के साथ 3 अगस्त को आरडीसी इलाके का औचक निरीक्षण कर समस्याओं की जमीनी हकीकत जानने का स्वयं प्रयास किया। इस दौरान श्री कलाल ने ट्रैफिक सुधार, पार्किंग समस्या के स्थायी समाधान, खराब स्ट्रीट लाइट को ठीक करने, अवैध अतिक्रमण हटाने के भी निर्देश दिए

Disclaimer: The views expressed in this article are the personal opinions of the author and do not necessarily reflect the views of MuktiDeep or its editorial team.