अमर भारती साहित्य की गोष्ठी में 'पावस ऋतु' पर कवियों ने अपनी रचनाओं से मंत्र मुग्ध किया।

हर युग में संदिग्ध रही है हमारी-तुम्हारी भूमिका: रघुवीर शर्मा


गाजियाबाद (मुक्तिदीप) रविवार को अमर भारती साहित्य संस्कृति संस्थान के तत्वावधान में पावस ऋतु पर केंद्रित एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

जिसमें कवि-कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पावस ऋतु के सौंदर्य व महत्व को दर्शाते हुए काव्य पाठ किया।गोष्ठी की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध कवि, आलोचक, संपादक व भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग में उपनिदेशक रघुवीर शर्मा ने की।

वरिष्ठ गीतकार डॉ. धनंजय सिंह के गोल्फ लिंक सोसायटी स्थित आवास पर हुई इस काव्य गोष्ठी की शुरुआत डॉ रमेश कुमार भदौरिया की सरस्वती वंदना के साथ हुई।इसके बाद हापुड़ से पधारी वरिष्ठ कवयित्री कमलेश त्रिवेदी फ़र्रूख़ाबादी ने वर्षा ऋतु पर मोहक गीत सुनाए।वरिष्ठ नवगीतकार संजय शुक्ल ने अपने नवगीत के माध्यम से सूखे की विभीषिका का बहुत मार्मिक वर्णन किया।सरिता विजय शर्मा ने सावन में ‘पीहर की याद’ पढ़ कर श्रोताओं को भावुक कर दिया।इसी क्रम में सोमदत्त शर्मा ने मोहक दोहे सुनाए।

गोष्ठी का संचालन करते हुए कवि प्रवीण कुमार ने अपनी कविताओं से भी खूब वाह-वाही लूटी। उनकी हरसिंगार व गुज़रा ज़माना कविताएँ बहुत पसंद की गयी। वरिष्ठ नवगीतकार व आलोचक वेद शर्मा वेद ने पावस ऋतु पर एक नवगीत सुनाते हुए वर्तमान युग की सच्चाई कुछ यूं बयां की-

तुम मीरा के श्याम हो गए हम तुलसी के राम

अपने हिस्से कलियुग आया

कबीर का क्या काम

वरिष्ठ गीतकार डॉ. धनंजय सिंह ने अपने चिरपरिचित अंदाज में अपनी रचनाओं से खूब रंग जमाया। उनकी ग़ज़ल के कुछ शेर इस तरह रहे-

रात बारिश में झर गए पत्ते

सारे आँगन में भर गए पत्ते

ठूंठ जंगल में राह तकता है

किस शहर में ठहर गए पत्ते

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि, आलोचक व संपादक रघुवीर शर्मा ने कई रंग व रसों की रचनाएं सुनाई।

उन्होंने पढा-

पूछना चाहता हूँ मैं

किसने दिया था ज़हर सुकरात को

गांधी को मारी थी गोली

सूली पर चढ़ाया था ईसा को

हर बार चुप रह जाते हो तुम

मैं स्वयं भी कहाँ बोल पाया

दरअसल हर युग में/ ऐसे हरेक कार्य में

संदिग्ध रही है

हमारी-तुम्हारी भूमिका।

इनके अलावा मृगेंद्र चतुर्वेदी मकरंद, निवेदिता शर्मा, मधु श्रीवास्तव, पूजा गुप्ता, अरुण चंद्र राय, अभिमन्यु सिंह ने भी सुंदर गीत व ग़ज़ल प्रस्तुत किए। काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ पत्रकार अमरेन्द्र राय, मधु सिंह, जगेश त्यागी व देवेंद्र सिंह आदि सुधी श्रोता भी उपस्थित रहे।

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