साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम त्रिवेणी का भव्य आयोजन
स्वर-संगीत-संवाद से सराबोर हुई साहित्यकारों की शाम
दिल्ली (मुक्तिदीप) स्वर-संगीत-संवाद से सराबोर रही साहित्यकारों की सुरमयी शाम! सुअवसर था कविता प्रभा राष्ट्रीय साहित्य समूह के तत्वावधान में दिल्ली के लक्ष्मीनगर में आयोजित साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम त्रिवेणी का। संयोजन, संचालन और मार्गदर्शन समूह प्रधान सह सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ.कविता सिंह ‘प्रभा’ कर रहीं थीं। उत्साह और उमंग से सभागार इस कदर लबालब था कि परिसर का ज़र्रा- ज़र्रा कविता, गीतों और ग़ज़लों से ओतप्रोत हो हर मुखड़े पर वाह-वाह कर रहा था। कार्यक्रम को अंजाम दे ऐतिहासिक बनाने आयीं थीं शब्दों की अंतरंग साधिका और सुप्रसिद्ध साहित्यकारों में शामिल डॉ सविता चड्ढा, प्रो.(डॉ) मंजुला दास, कमलेश गुप्ता, सीमा श्रीवास्तव 'सीमा श्री ', डॉ. कविता मल्होत्रा, सुरक्षा खुराना, पुष्पा सिन्हा, ममता त्रिपाठी ‘ममत्व’, रंजना मजूमदार, वीणा अग्रवाल, डॉ. पुष्पा रानी वर्मा, सौम्या दुआ, रेनू रतन मिश्रा, अर्चना सक्सेना, डॉ. शुभ्रा। वहीं कार्यक्रम में चार चाँद लगा रहे थे मुख्य अतिथि हिंदी अकादमी दिल्ली के पूर्व उप सचिव ऋषि कुमार शर्मा, ग्रुप कैप्टन अखिलेश कुमार सिंह, राजीव गौतम, प्रकाशक राजीव कुमार त्रिपाठी।
साहित्यकारों ने कविताओं, छंदों, ग़जलों, कुंडलिया, सवैया और मुक्तकों की झड़ी लगा दी। वहीं गीतों के मुखड़े और अंतरे ने भी खूब तालियाँ बटोरीं। इस अवसर पर साहित्यिक सवालों के भी समाधान ढूँढे गए। साहित्यिक विमर्श में हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार,लेखन, शैली, पाठक-पठनीयता और साहित्यकारों की भूमिका पर गहन विचार किया गया। आयोजन के अंतिम सत्र में प्रेरणादायक गीतों को सभी ने कोरस में गुनगुनाया।
कार्यक्रम का आगाज़ दीप प्रज्ज्वलन, श्री गणेश और सरस्वती वंदना से हुआ। साहित्यकारों का स्वागत समूह की संस्थापक डॉ कविता सिंह ‘प्रभा’ ने पौधा भेंट कर के किया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन व राष्ट्रीय गान से हुआ।
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