युवा कवयित्री गोस्वामी दिव्या भारती की काव्य कृति का भव्य लोकार्पण
श्रीकृष्ण, भाषा, कविता, प्रेम और वृन्दावन के अनुराग में डूबी रचना है 'वृन्दावन प्रेयसी’: अलका सिन्हा
नई दिल्ली (मुक्तिदीप) प्रेम जब भक्ति से मिलता है और आस्था जब कविता का रूप धारण करती है, तब शब्द केवल शब्द नहीं रहते, वे अनुभूतियों का संसार रचने लगते हैं। इसी भावभूमि को साकार करती युवा कवयित्री गोस्वामी दिव्या भारती की काव्य-कृति ‘वृन्दावन प्रेयसी’ का लोकार्पण शनिवार को द्वारका स्थित क्रिएटिव अनलॉक, सेक्टर-7, नई दिल्ली में साहित्य 24 प्रकाशन के तत्वावधान में आयोजित गरिमामय समारोह में किया गया।
पुस्तक लोकार्पण एवं काव्य-पाठ के इस अवसर पर साहित्यकारों, कवियों और साहित्यप्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार सुश्री अलका सिन्हा थीं, जबकि सारस्वत अतिथि के रूप में हिंदी अकादमी, दिल्ली के पूर्व उपसचिव ऋषि कुमार शर्मा उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में युवा कवि दास आरोही आनंद एवं साहित्य 24 के संपादक हरिप्रकाश पांडेय शामिल रहे। कार्यक्रम का प्रभावशाली संचालन कानपुर के सुप्रसिद्ध लेखक एवं कवि प्रशांत अवस्थी ‘प्रखर’ ने किया।
कृति के लोकार्पण के अवसर पर कवयित्री गोस्वामी दिव्या भारती ने कहा कि ‘वृन्दावन प्रेयसी’ उनके अंतर्मन की संवेदनाओं, प्रेम, आस्था और रचनात्मक अनुभूतियों का काव्यात्मक प्रतिफलन है। संग्रह में प्रेम और भक्ति के साथ मानवीय संवेदनाओं तथा जीवन के विविध भावों को अभिव्यक्ति देने का प्रयास किया गया है।
मुख्य अतिथि अलका सिन्हा ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि ‘वृन्दावन प्रेयसी’ एक अद्भुत कृति है, जिसमें श्रीकृष्ण, भाषा, कविता, प्रेम और वृन्दावन के प्रति कवयित्री की सच्ची आस्था दिखाई देती है। प्रेम में डूबी हुई रचनाएँ कवयित्री के रचनात्मक व्यक्तित्व को व्यापकता प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य 24 प्रकाशन द्वारा नए रचनाकारों को प्रकाशन का अवसर देकर उनकी रचनाओं को पाठकों तक पहुँचाना साहित्य के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण पहल है।
सारस्वत अतिथि ऋषि कुमार शर्मा ने कहा कि दिव्या भारती की कविताएँ पढ़ते हुए धर्मवीर भारती की कालजयी कृति ‘कनुप्रिया’ का स्मरण सहज ही हो आता है। उन्होंने कहा कि ‘कनुप्रिया’ जहाँ एक लंबी कविता के माध्यम से राधा-कृष्ण के प्रेम, प्रतीक्षा और अंतर्द्वंद्व को स्वर देती है, वहीं दिव्या भारती ने अपनी 76 कविताओं में प्रेम, आस्था और द्वंद्व को अपने विशिष्ट ढंग से अभिव्यक्त किया है। उन्होंने युवा रचनाकारों को प्रोत्साहित किए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि नई पीढ़ी की संवेदनाएँ हिंदी साहित्य को नई दृष्टि और नई दिशा प्रदान कर सकती हैं।
विशिष्ट अतिथि दास आरोही आनंद ने कवयित्री की रचनाओं को प्रभावशाली बताते हुए कहा कि युवा प्रतिभाओं को निरंतर सृजन करते रहना चाहिए। ऐसी रचनात्मक ऊर्जा ही साहित्य की परंपरा को जीवंत और गतिशील बनाए रखती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रसिद्ध लेखक एवं गायक मनोज कुमार सिन्हा ने सरस्वती वंदना से किया। इसके पश्चात कवयित्री ने ‘वृन्दावन प्रेयसी’ से चुनिंदा रचनाओं का भावपूर्ण काव्य-पाठ किया। उनकी कविताओं में प्रेम, कृष्ण-भक्ति, विरह, समर्पण और संवेदना के स्वर सुनाई दिए, जिन्हें उपस्थित साहित्यप्रेमियों ने सराहा। संचालन करते हुए प्रशांत अवस्थी ‘प्रखर’ ने कहा कि अपनी कमाई से काव्य-संग्रह प्रकाशित कर उसे पाठकों तक पहुँचाना किसी भी युवा रचनाकार के लिए बड़ी उपलब्धि है।
समारोह में साहित्य, पुस्तक प्रकाशन और युवा रचनाकारों की भूमिका पर सार्थक विमर्श भी हुआ। इस अवसर पर युवा कवि अनुराग सक्सेना और प्रसिद्ध ग़ज़लकार अशोक कुमार भारद्वाज सहित अनेक साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।
अंत में साहित्य 24 प्रकाशन की ओर से संपादक हरिप्रकाश पांडेय ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों एवं साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कुल मिलाकर यह आयोजन नई पीढ़ी की साहित्यिक चेतना, कृष्ण-प्रेम और हिंदी काव्य की समृद्ध होती परंपरा का सुंदर उत्सव बन गया
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