देश भर से आए अदीबों से गुलज़ार हुई "बारादरी"
बारादरी के मंच पर फनकारी का हर रंग मौजूद है: अनुराग मुस्कान
गाज़ियाबाद (मुक्तिदीप) सुप्रसिद्ध साहित्यिक संस्था 'बारादरी' के बैनर तले एक बार फिर देश के शायरों/कवियों ने अपने क़लाम गीत,गज़लों व कविताओं की महक बिखरे दी।
'महफ़िल ए बारादरी' की अध्यक्षता कर रहे मशहूर शायर डॉ. शफक सोपोरी ने कहा कि यह कार्यक्रम हमारी सांस्कृतिक विरासत की मिसाल है। 'बारादरी' के तराने कश्मीर से कन्याकुमारी तक अदब को आबाद करने का काम कर रही है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध पत्रकार व कवि अनुराग मुस्कान ने कहा कि 'बारादरी' में धुरंधर कवियों और शायरों को सुन कर मैं तीन दशक पीछे चला गया। और मंच के तो क्या ही कहने, यहां फनकारी का हर रंग मौजूद है।
नेहरू नगर स्थित सिल्वर लाइन प्रेस्टीज स्कूल में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मनीषा जोशी की सरस्वती वंदना 'मां शरण में आ गई मैं, दीप बन जलती रहुंगी...' से हुआ। कार्यक्रम अध्यक्ष श्री सोपोरी के शेर 'आरजू है के तेरे हाथों में, अपना चेहरा छिपा के मर जाएं' को भरपूर सराहना मिली
मुख्य अतिथि अनुराग 'मुस्कान' ने कहा कि बारादरी देश भर के फनकारों का 'गुलशन' बना हुआ है, जो गीत, ग़ज़ल और शायरी की खुशबू से महक रहा है। उन्होंने अपने हर शेर पर दाद बटोरी। मुख्य अतिथि श्री मुस्कान ने कहा कि लेखन के प्रारंभिक दौर में सीखा ग़ज़ल का व्याकरण मीडिया की दुनिया में आते ही बिगड़ गया। मीडिया की व्यस्तता में जिंदगी के रदीफ काफ़िए ही बिगड़ गए। मौजूदा मानवीय रिश्तों पर पढ़े गए उनके अशआर 'अपने जैसे यारों के कहां यार मिलेंगे, जितने लोग मिलेंगे बेकार मिलेंगे। मिला के कंधा चलने वाला कोई नहीं, मर जाओ तो देने वाले चार मिलेंगे। मेरी मय्यत पर भी तो अश्क बहाता कोई, गली के मोड़ तक ही सही पर आता तो सही' भरपूर सराहे गए।
संस्था के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंघल को शेर इन दबी सिसकियों से क्या होगा, लोग बहरे हैं चीखना होगा। सोचिए क्यों वो दे गया गाली, टालिए मत कि सिरफिरा होगा' पर भरपूर सराहना मिली। संस्थापिका अध्यक्ष डॉ माला कपूर 'गौहर' के अशआर 'नाज़ बरदार देर से आए, कुछ अदाकार देर से आए, नाम-ए- 'गौहर' ही सुर्ख़ियों में रहा आज अख़बार देर से आए' के अलावा 'ये ख़ौफ़ रहता है मुझको हर पल ज़माना ज़ालिम बहुत है देखो, रखी हमेशा जो तुमने चाहत की पर्दादारी तो मैं तुम्हारी। मेरा सुख़न भी है 'गौहर' आला मेरा तकल्लुम बहुत ही प्यारा, मगर मेरी हर कमी भी तुमको हुई जो प्यारी तो मैं तुम्हारी' भी भरपूर सराहे गए। मशहूर शायर मासूम ग़ाज़ियाबादी के शेर 'जो काफिर और मोमिन में सुलह कराने निकले थे, वही फिरका परस्ती के कायल निकल आए। वो इक मासूम पागल थी कि जिसका जिस्म ढकने को, सुना है चांद को ढकने कई बादल निकल आए' भी सराहे गए।
रूस से आईं श्वेता सिंह ने फरमाया 'उस रब के इतने मजहब क्यूं हैं, खुद को अव्वल बताने को बेसबब क्यूं है, सच है कि हर रूह से झांकता है तू, तेरी औलाद फिर इतनी बेअदब क्यूं है।' इस अवसर पर सुप्रसिद्ध गीतकार इंद्रजीत सुकुमार को 'बारादरी सृजन सम्मान' से अलंकृत किया गया। उनकी पंक्तियां 'यूं भी दिल में आना जाना कीजिए, खुद से मिलने का बहाना कीजिए' और उनका गीत भी सराहे गए। कार्यक्रम का संचालन खुश्बू सक्सेना और आलोक यात्री ने संयुक्त रूप से किया। खुश्बू की पंक्तियों 'मैं अगर आम की हवा होती, रोज ही चांदनी के घर जाती। देख रखी है मौत की सूरत, आईना देखती तो डर जाती' भी सराही गईं।
डॉ. तारा गुप्ता की पंक्तियां 'सच बोल करके उनसे तमाशा सा हो गया, जो भी कहा है मैंने मुकरने दे आज फिर' और नेहा वैद का गीत 'प्यार मिसरी की डली है, तुमसे मिल कर ये लगा' भी सराहे गए। परिवेश पर कटाक्ष के तौर पर विनय विक्रम सिंह के अवधी भाषा के शेर 'केत्ता रेउड़ी खइहौ भइया सरम करो, वै ब्वालैं तुमका तनखइया सरम करो। लीक भये हैं पेपर इत्ते काव कही, उमिर बीति गै बनि कनकइया सरम करो' भी पसंद किए गए। युवा शायर आशीष मित्तल ने अपने अशआर 'इश्क़ के दुश्मनों को जन्नत दो, बंद जन्नत के ताले कर दो। सब रक़ीबों का पेट भर जाए, मेरे इतने निवाले कर दो ख़ुद को लिख दो मेरी क़िस्मत में, बाक़ी सब हर्फ़ काले कर दो' पर सबकी दाद बटोरी। पेशे से चिकित्सक डॉ नसीम अलीग ने कहा 'कोई समझे न समझे वो मुझे अच्छा समझती है, मैं बूढ़ा हो रहा हूं मां मुझे बच्चा समझती है'।
इसके अलावा राजीव सिंघल, सुरेंद्र शर्मा, संजीव शर्मा, डॉ. नरेंद्र शर्मा, संजीव निगम अनाम, प्रदीप भट्ट, दिनेश कुमार श्रीवास्तव, शरवत उस्मानी, ऋचा सूद, डॉ. राम गोपाल भारतीय, मनीषा जोशी, अभिलाषा विनय, मारिया उस्मानी, सचिन परवाना, मनीषा गुप्ता, संजीव नाद़ान, शुभ्रा पालीवाल एवं श्वेता श्रीवास्तव 'शैदी' की रचनाएं भी सराही गईं। इस अवसर पर सुभाष चंदर, सरवर हसन सरवर, मोनी गोपाल शर्मा, पंडित सत्य नारायण शर्मा, वी. के शेखर, अनिमेष शर्मा 'आतिश', सुशील शर्मा, सोनम यादव, देवेंद्र शर्मा 'देव', अरुण चन्द्र राय, विपिन जैन, राधा रमण, डॉ. सुमन गोयल, तिलक राज अरोड़ा, देवेंद्र गर्ग, अक्षयवरनाथ श्रीवास्तव, सुभाष अखिल, सुमित्रा शर्मा, शशिकांत भारद्वाज, पुनीता झा, संजय भदौरिया, फरहत खान, अर्चना शर्मा, विनोद कुमार तोमर, राज कुमार सिंह, अशहर इब्राहिम, राजेश कुमार, उत्कर्ष गर्ग, डॉ. हिमांशु कुमार सिंह, नीलम सिंह, किरण कुमारी, दीपा वर्मा, मनु बुदेली, श्वेता चौधरी, कल्पना व यश शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित थे।
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