आलोक यात्री

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आलोक यात्री

वरिष्ठ लेखक / पत्रकार

5 articles · writing since August 2026

महानगर में एक पल्ले के दरवाजे सी जिंदगी: अलोक यात्री

महानगर के इंसान की हैसियत को आंकने, देखने का सबका अलग-अलग पैमाना हो सकता है। लेकिन लगभग दो दशक के दौरान मेरा निजी आकलन यह है कि महानगर में आदमी एक पल्ले का दरवाजा हो कर रह गया है। इस बात का अहसास लगभग...

यह कोई रील स्टोरी नहीं है...

◆ आलोक यात्रीएक सीन में दिखाई पड़ते हैं तीन आदमी। जी हां! तीन आदमी। 18 साल का बेटा, मां और बाप... पहाड़ की खतरनाक चोटी पर...मंज़र को लाइव देख रहे दर्शकों की हैप्पी एंडिंग की आशा के बिल्कुल विपरीत बहुत...

फिल्म "चिल्लर पार्टी" देखी क्या..?

◆ आलोक यात्रीजंतर मंतर पर सब कुछ सामान्य चल रहा था लेकिन पता नहीं किस तुफैल में किसी ने बोतल का ढक्कन खोल दिया ढक्कन खुलते ही... जिन बोतल से बाहर आ गया और इन दिनों विक्रमादित्य की पीठ पर बेताल की तरह...

अदालती कार्रवाई में साहित्य का समावेश

◆ आलोक यात्री कहते हैं भूख से बड़ी त्रासदी कोई दूसरी नहीं। क्या ईश्वर ने मानव को भूख की सौगात देकर इस धरती पर भेजा है। भूख और उसके वैश्विक आंकड़ों को देख कर तो ऐसा ही लगता है। दुनिया की एक बड़ी आबादी...

इतिहास/राजनीति

वह था "हिबाकुशा"...

◆ श्री आलोक यात्रीयह कहानी त्सुतोमु यामागुची की है। जो हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमले के पीड़ित थे। वह स्वयं को "हिबाकुशा" कहते थे। यह कहानी उन्होंने खुद मरने से कुछ पहले दुनिया को सुनाई थी।...