Topic

व्यंग्य

1 article

व्यंग्य

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन्

◆ डॉ स्वाति चौधरीहे मनुष्य! तू यदि सोचता है कि कर्म करूँगा तो फल पाऊँगा, और फल न मिले तो ईंट-गारा, जूता-चप्पल, मुक़दमा-इल्ज़ाम धर दूँगा—तो तू भ्रम में है। अरे भोले प्राणी! तू फल पर क्यों हक़ जमाता है,...