पुणे की “ गूंज “ बहुत दूर तक जाएगी
◆ अमरेंद्र कुमार राय
राहुल गांधी को अब कोई “ पप्पू “ नहीं कहता। न इसकी चर्चा होती है। राहुल गांधी के सफेद टी शर्ट की भी अब चर्चा नहीं होती। उनके बारह हजार के जूतों की भी अब चर्चा नहीं होती। बल्कि इस समय उनके लाल और पीले शर्ट की चर्चा है। उन बातों की चर्चा है जो वो “ छात्रों की गूंज “ कार्यक्रम में कर रहे हैं। राहुल ने अब तक छात्रों की गूंज के चार कार्यक्रम किये हैं और हर कार्यक्रम की बेतरह चर्चा हुई। चाहे कोटा का पहला कार्यक्रम हो या देहरादून का दूसरा या फिर प्रयागराज का तीसरा। हर जगह मोदी-शाह की केंद्र की सरकार और राज्यों में उनकी डबल इंजन की सरकार ने कार्यक्रम की सफलता में बाधा डालने की कोशिश की, लेकिन हर कार्यक्रम पहले से ज्यादा शानदार हुआ। पुणे के कार्यक्रम ने तो सत्ता पक्ष के दिल में दहशत ही पैदा कर दी है। सचमुच पुणे के कार्यक्रम की गूंज बहुत दूर तक जाएगी।
बाकी तीन जगहों की तरह पुणे के कार्यक्रम को भी न होने देने की कोशिश की गई। पर जब भीड़ उमड़ती है, लोग चाहते हैं तो उस कार्यक्रम को भला कौन रोक सकता है। पुणे में भी वही हुआ। कोटा, देहरादून और प्रयागराज में राहुल ने छात्रों से संवाद किया, जबकि पुणे में छात्राओं से। बल्कि यूं कहिये कि छात्राओं के बहाने पूरे स्त्री समाज से। देश की आबादी के 70 करोड़ से। हालांकि अनुमानित आबादी 71.55 करोड़ ( 71,55,05,781 ) यानी कुल जनसंख्या का लगभग 48.46 प्रतिशत है। पुणे में भी कार्यक्रम में बाधा डालने की कोशिश की गई। छात्राएं राहुल गांधी के कार्यक्रम में न पहुंचें इसके लिए धारा 144 लगा दी गई। पुणे के लड़कियों के एक छात्रावास में कुछ छात्राएं अपनी समस्या राहुल गांधी को बताना चाहती थीं। जैसे ही पता चला, आरोप है कि अखिल भारतीय विद्यार्धी परिषद ( राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और बीजेपी की छात्र इकाई ) के लोग वहां पहुंच गये और छात्राओं को बंधक बना लिया। उन्हें उनके कमरों में बंद कर दिया ताकि वे राहुल गांधी के कार्यक्रम में न पहुंच पाएं और अपनी समस्या उन्हें न बता पाएं। उन छात्राओं को तीन साल से छात्रवृत्ति के पैसे नहीं मिल रहे हैं। जैसे ही इस बात की भनक कांग्रेस की छात्र इकाई राष्ट्रीय छात्र संगठन ( नेशनल स्टूडेंट यूनियन ऑफ इंडिया, एनएसयूआई को लगी, वे भी वहां पहुंच गये। विद्यार्थी परिषद के लोगों ने उन पर भी हमला किया। एनएसयूआई के कुछ छात्र घायल भी हो गये। बावजूद इसके पुलिस ने एनएसयूआई के ही करीब 40 छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। लेकिन इतने के बावजूद राहुल गांधी का कार्यक्रम हुआ। बल्कि और भी ज्यादा उत्साह से। पुणे और आसपास की छात्राएं उमड़ पड़ीं। छात्राओं की भीड़ और भीड़ का उत्साह देखते ही बनता था।
जैसा कि आम तौर पर हो रहा है राहुल “ छात्रों की गूंज “ के इस कार्यक्रम में छात्रों से संवाद करते हैं। उनकी समस्याएं सुनते हैं और उसी से संबंधित अपनी बात रखते हैं। पुणे में भी उन्होंने ऐसा ही किया। मंच पर पहुंचते ही उन्होंने साफ किया कि वे यहां छात्राओं से बात करने आए हैं, राजनीति करने नहीं। बल्कि एक लड़की जब कुछ कह रही थी और बात राजनीतिक होने लगी तो उसने राहुल गांधी से कहा कि सर, मुझे अभी बहुत कुछ कहना है लेकिन बात राजनीतिक ज्यादा हो जाएगी। तब राहुल ने खुद उसे रोका कि नहीं, रहने दो। राहुल गांधी ने छात्राओं से इस कार्यक्रम में स्त्रियों की सुरक्षा, उनके सम्मान, रोजगार के अवसर और उनके स्वाभिमान को लेकर बात की। राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को एक तरह से कैद कर दिया गया है। उन्होंने उनसे उस पिंजरे को तोड़ने की अपील की। उन्होंने छात्राओं से तथ्यपरक बातें कीं। कई छात्राएं मंच पर आईं और उन्होंने अपनी समस्याएं राहुल गांधी को बताईं। राहुल गांधी ने बाद में उन समस्याओं का निचोड़ पेश किया और उनसे मुक्ति की अपील की। राहुल गांधी ने महिलाओं को बताया कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हिंसा का प्रयोग किया जाता है। समाज में 80 प्रतिशत महिलाएं उत्पीड़न का सामना करती हैं। 29 फीसदी महिलाओं को तो बाकायदा हिंसा का सामना करना होता है। और छह फीसदी महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें बलात्कार का शिकार होना पड़ता है। उन्होंने ये भी कहा कि ये भी असली और सही तस्वीर नहीं है क्योंकि 99 प्रतिशत घटनाओं की तो रिपोर्ट ही दर्ज नहीं होती। चाहे वह लोकलाज के कारण परिवार के लोग रिपोर्ट दर्ज नहीं कराते या फिर सिस्टम अपने बचाव में दर्ज नहीं करता।
अभी हाल ही में नई दिल्ली के जंतर मंतर पर जेन जी छात्रों का अभूतपूर्व और काफी हद तक सफल आंदोलन हुआ था। उस आंदोलन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गढ़ी गई झूठी छवि की पोल खोलकर रख दी। कहना चाहिए उसने ब्रांड मोदी को ही ध्वस्त कर दिया। उस घटना के बाद से मोदी छिपे-छिपे फिर रहे हैं। मानसून सत्र के 19 दिन में एक दिन भी सदन में नहीं गये। बस समापन वाले दिन चेहरा दिखाने पहुंचे और संसद कुछ मिनटों में ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में जेन जी की नाराजगी दूर करने के लिए उन्होंने पांच वीडियो डाले। जिनमें एक वीडियो में उन्होंने छात्रों को माफ करने की बात कही तो एक वीडियो में यहां तक कहा कि वे छात्राओं के गाली देने से हतप्रभ हैं।
राहुल गांधी ने अपने कार्यक्रम में उस मुद्दे को भी उठाया। कहा कि गाली लड़कों ने भी दी और लड़कियों ने भी। लेकिन मोदी जी को गाली सिर्फ लड़कियों की बुरी लगी। क्योंकि वे मानते हैं कि लड़कों को तो गाली देने का अधिकार है, लड़कियों को नहीं। इसी तरह “ मनुस्मृति “ की बातों को भी उन्होंने कोट किया। कहा, मनुस्मृति में कहा गया है कि महिलाओं को कभी भी आजाद नहीं रहना चाहिए। बचपन में वे पिता के अधीन रहती हैं, युवावस्था में पति के अधीन और जब पति नहीं होता तो बच्चों के अधीन। राहुल ने इस बात का प्रतिकार किया। महिलाओं से भी इसका प्रतिकार करने की अपील की। उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे आखिर किसी के अधीन क्यों रहें ? वे अपनी मर्जी की खुद मालिक हैं। जो चाहें करें। उन्होंने कहा कि पिता, पति और पुत्र से उनका रिश्ता है। इसका मतलब ये नहीं कि वे उनके अधीन रहें, उनकी गुलाम हो जाएं। उन्हें अपनी मर्जी का मालिक खुद बनना चाहिए। सचमुच राहुल की यह बात बहुत दूर तक जाएगी। इस कार्यक्रम में सिर्फ छात्राएं ही नहीं आई थीं, बल्कि उनकी माएं और दूसरी स्त्रियां भी आई थीं। राहुल की बातों का संदेश सिर्फ छात्राओं तक ही नहीं पहुंचा बल्कि पूरे स्त्री समाज तक पहुंचा है। आधी आबादी तक। सचमुच यह मोदी-शाह के लिए खतरे की घंटी है।
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