अमरेंद्र कुमार राय

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अमरेंद्र कुमार राय

अमरेंद्र कुमार राय वरिष्ठ पत्रकार हैं। ये पिछले 45 वर्षों से पत्रकारिता कर रहे हैं। इन्हें प्रिंट और टीवी दोनों ही क्षेत्रों का पर्याप्त अनुभव है। प्रिंट में इन्होंने जनसत्ता और अमर उजाला जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम किया है। टीवी में सहारा टीवी, जी न्यूज और इंडिया टीवी में बड़े पदों पर रहे हैं। इन्होंने तीन पुस्तकें भी लिखी हैं, जिसमें नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित पुस्तक " गंगा तीरे " काफी चर्चित है। पिछले दस साल से भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो से मान्यता प्राप्त पत्रकार हैं।

10 articles · writing since July 2026

ज्ञानेश कुमार को खतरा ! :अमरेंद्र कुमार राय

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को Z + ( जेड प्लस ) श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है। भारत में नागरिकों को मिलने वाली सुरक्षा का यह दूसरा सबसे बड़ा स्तर है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर )...

वोट नहीं तो लोकतंत्र कैसा: अमरेंद्र कुमार राय

चुनाव आयोग की साख को एक बार फिर बट्टा लगा है। हाल ही में एक प्रमुख अंग्रेजी अखबार ने छापा है कि चुनाव आयोग के दो चुनाव आयुक्तों ने पिछले दस महीनों में 14 बार पत्र लिखकर आपत्ति जताई है कि चुनाव आयोग मे...

“सरस्वती" का उद्गम देखने की ललक ◆ अमरेंद्र कुमार राय

भारत में गंगा को मां कहा जाता है। उसी तरह सरस्वती नदी को विद्या की देवी कहा जाता है। बचपन में जब हम पुस्तक खोलते थे तो पहले उसे प्रणाम करते थे। पांव लग जाए तो अपराध बोध से ग्रसित हो जाते थे और प्रणाम...

कितना बचा है लोकतंत्र: अमरेंद्र कुमार राय

अभी हाल ही में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से सवाल पूछने पर दिल्ली पुलिस ने दो महिला पत्रकारों की जमकर पिटाई की। देश की राजधानी नई दिल्ली में ही भारत सरकार के पूर्व नौकरशाह आशीष जोशी को उठा लिया...

अमेरिका में अलग भागवत: अमरेंद्र कुमार राय

हिंदुओं के मूल ग्रंथों में वेद, उपनिषद, पुराण आदि हैं। लेकिन इन्हें बहुत कम हिंदुओं ने पढ़ा है। इनके विपरीत रामायण ( राम चरित मानस ), महाभारत, श्रीमदभागवत गीता और श्रीमदभागवत ज्यादा पढ़े गये हैं। रामा...

पुणे की “ गूंज “ बहुत दूर तक जाएगी

◆ अमरेंद्र कुमार रायराहुल गांधी को अब कोई “ पप्पू “ नहीं कहता। न इसकी चर्चा होती है। राहुल गांधी के सफेद टी शर्ट की भी अब चर्चा नहीं होती। उनके बारह हजार के जूतों की भी अब चर्चा नहीं होती। बल्कि इस सम...

“अरबन नक्सली" से “दिमागी नक्सली' तक का सफर

◆अमरेंद्र कुमार राय15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब लाल किले से भाषण दिया तो लोगों ने दो चीजें खासकर नोटिस कीं। एक कांपते हाथ और लड़खड़ाती जुबान और दूसरा दिमागी नक्सली का “ जुमला “। हां, इस...

राजनीति पर जेन जेड का असर

◆ अमरेंद्र कुमार रायभोजपुरी इलाके में पहले रात को जब छोटे बच्चे नहीं सोते थे तो उन्हें यह कहकर डराया जाता था कि जल्दी सो जाओ वरना “ हुंड़ार “ आयेगा और ले जाएगा। आजतक यह समझ में नहीं आया कि यह “ हुंड़ा...

गोदी मीडिया के जमाने में सोशल मीडिया खबरों का एक बड़ा स्रोत है

◆ अमरेंद्र कुमार रायआजकल मैं अखबार नहीं पढ़ता। टीवी पर खबरें देखना बहुत पहले ही छोड़ चुका हूं। ऐसा इसलिए क्योंकि मुझे लगता है कि अखबार और टीवी सही खबरें नहीं प्रकाशित कर रहे, न दिखा रहे हैं। पिछले करी...

राजनीति

भूकंप जैसा रहा “कॉकरोच” आंदोलन

किसी आंदोलन की तुलना भूकंप से करना ठीक नहीं। क्योंकि भूकंप बिना बताए आता है और कुछ सेकेंड या कुछ मिनट में बहुत कुछ तहस नहस करके चला जाता है। लेकिन नतीजों के मामले में देखें तो “कॉकरोच” आंदोलन ने सरकार...