यह कोई रील स्टोरी नहीं है...

◆ आलोक यात्री

एक सीन में दिखाई पड़ते हैं तीन आदमी। जी हां! तीन आदमी। 18 साल का बेटा, मां और बाप... पहाड़ की खतरनाक चोटी पर...

मंज़र को लाइव देख रहे दर्शकों की हैप्पी एंडिंग की आशा के बिल्कुल विपरीत बहुत ही भयावह मंज़र के साथ तीन घंटे का यह सीन दिल और दिमाग झकझोरने के साथ समाप्त होता है।

अब अतीत पर एक नज़र...

आज से पचास साल पहले आई फिल्म 'शोले' का एक सीन है

शायद एक पावरफुल विलेन की एंट्री वाला

फिल्म का खलनायक गब्बर सिंह पथरीली पहाड़ियों पर चलते हुए पूछता है- "कितने आदमी थे...?"

ज़वाब मिलने के बाद वो फिर पूछता है- "और तुम तीन... सज़ा मिलेगी... बरोबर मिलेगी..." धांय... धांय... धांय... "तीनों खल्लास..."

एक क्रूर अट्टाहस के साथ सीन खत्म हो जाता है

लेकिन यह ख़ौफ़नाक सीन उतना नहीं झकझोरता जितना यह ताज़ा मंज़र झकझोरता है

एक पहाड़ी की खतरनाक खाई के मुहाने पर एक किशोर टहल रहा है

पहाड़ी के अलग अलग हिस्से पर लोग जमा हैं

तीन घंटे लंबा एक सीन तीन सेकेंड के एक झकझोर देने वाले दृश्य के साथ समाप्त हो जाता है

पुलिस इंस्पेक्टर आता है

पूछता है "कितने आदमी थे...?"

"तीन... हुज़ूर..."

जी हां! तीन आदमी

18 साल का बेटा, मां और बाप

पहाड़ी की खतरनाक खाई के मुहाने पर टहल रहे किशोर की डिमांड है कि उसे आईफोन चाहिए... नहीं तो वह तीन सौ फुट ऊंची चोटी से कूद कर जान दे देगा

कभी मैंने ही लिखा था "मोबाइल फोन एक अच्छा सेवक और बुरा मालिक है" (Mobile Phone is a Good Servant but Bad Master)

और आज यह एक बार फिर सच साबित हो गया...

महाराष्ट्र के संभाजी नगर इलाके में कुणाल चांदगुडे नाम का युवक कई दिनों से iPhone लेने की जिद पर अड़ा था और अपनी बात मनवाने के लिए या मां बाप को ब्लैकमेल के इरादे से तथाकथित सुसाइड प्वाइंट पर खड़ा था

बेटे के इरादे और हठ का पता चलते ही पिता

मुरलीधर चांदगुडे और मां संगीता उसे समझाने पहाड़ी पर गए थे। तीन घंटे तक मां बाप और गांव वाले कुणाल को समझाते रहे।

एक वीडियो में साफ दिख रहा है कि उसकी मां बदहवास हालत में उसे ऐसा करने से रोक रही है। मां चीख-चीख कर उसे पुकार रही है। मां बार-बार कह रही है कि बेटा मैं तेरे पैर पड़ती हूं..., तू वापस आ जा..., रुक जा... ऐसा मत कर... लेकिन बेटे नहीं मानता।

कुणाल के पिता मुरलीधर किसी तरह उसके करीब पहुंचे। उन्होंने बेटे को समझाने के साथ उसे पकड़कर सुरक्षित वापस लाने की कोशिश की। इसी दौरान कुणाल ने पहाड़ी से नीचे छलांग लगा दी। बेटे को बचाने के प्रयास में पिता ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वह भी पहाड़ी से नीचे गिर गए।

पति और बेटे को अपनी आंखों के सामने गिरते देख मां संगीता पर ऐसी बदहवासी छाई कि उसने भी पहाड़ी से नीचे छलांग लगा दी

कुछ ही मिनट में परिवार के तीनों सदस्यों की मौत हो गई

यह कोई फिल्मी सीन नहीं है, रियल सीन है

एक ग़लत फैसले ने तीन ज़िन्दगी ही नहीं उजाड़ी बल्कि किशोर मन की भयावह भटकन को भी उजागर कर दिया।

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