अमेरिका में अलग भागवत: अमरेंद्र कुमार राय


हिंदुओं के मूल ग्रंथों में वेद, उपनिषद, पुराण आदि हैं। लेकिन इन्हें बहुत कम हिंदुओं ने पढ़ा है। इनके विपरीत रामायण ( राम चरित मानस ), महाभारत, श्रीमदभागवत गीता और श्रीमदभागवत ज्यादा पढ़े गये हैं। रामायण में जहां राम के चरित्र का वर्णन है, वहीं महाभारत में कौरव-पांडव के युद्ध का वर्णन है। श्रीमदभागवत गीता में कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया ज्ञान है तो श्रीमदभागवत में तरह-तरह की पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं हैं। हिंदुओं में रामायण, महाभारत और श्रीमदभागवत गीता के बाद श्रीमदभागवत सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाला धर्मग्रंथ है। लेकिन एक भागवत और भी है। वो हैं राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत। दो दिन पहले अमेरिका में थे। इन्होंने भी शायद भागवत पढ़ी ही होगी। लेकिन ये भारत में कोई और भागवत कथा कहते हैं और अमेरिका में कोई और । इसीलिए इनकी ओर सबका ध्यान गया।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मूल रूप से हिंदुओं का संगठन है। इसका उद्देश्य भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना है। इसी उद्देश्य के साथ 1925 में इसकी स्थापना की गई थी। 1925 में देश अंग्रेजों का गुलाम था। तब देश में आजादी की लड़ाई लड़ी जा रही थी। उस समय संघ आजादी की लड़ाई लड़ने के बजाय अंग्रेजों के साथ तालमेल बिठाकर देशभक्तों के खिलाफ काम कर रहा था। जब आजादी मिली तो उसने इसके तिरंगे झंडे और संविधान को स्वीकार नहीं किया। यह भारत के विभाजन को भी स्वीकार नहीं करता था और इसके लिए राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराता था। इसका यह भी मानना था कि अगर धर्म के आधार पर भारत का विभाजन हुआ है तो जिस तरह से पाकिस्तान इस्लामिक राष्ट्र बना उसी तरह से भारत को हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए था। तभी से वह भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने में लगा हुआ है। उसका यह भी मानना है कि जब धर्म के आधार पर पाकिस्तान बना, मुसलमानों के लिए पाकिस्तान बना तो भारत में कोई मुसलमान नहीं रहना चाहिए। सभी मुसलमानों को उस समय पाकिस्तान चले जाना चाहिए था। अगर जो लोग नहीं गये और भारत में रह गये तो उन्हें हिंदुओं की अधीनता स्वीकार करनी चाहिए। जिस तरह से पाकिस्तान में हिंदू दोयम दर्जे के नागरिक हैं, उसी तरह से भारत में मुसलमानों और दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को दोयम दर्जे की नागरिकता स्वीकार करनी चाहिए।

इस तरह के विचार आप संघ और उसके आनुषंगिक संगठनों, जो पचास से भी ज्यादा हैं, के नेताओं के मुखारबिंद से अक्सर सुनते रहते होंगे। संघ की राजनीतिक शाखा भारतीय जनता पार्टी है जो आजकल 12 वर्षों से केंद्र की सत्ता में है। इसके साथ ही करीब डेढ़ दर्जन राज्यों में भी बीजेपी की सरकारें हैं। केंद्र से लेकर राज्य तक के बीजेपी नेता मुसलमानों के खिलाफ अभियान छेड़े रहते हैं। संघ के नेता तो खैर मुसलमानों के खिलाफ बोलते ही रहते हैं। असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने एक बार कहा कि रोजमर्रा के कामों में मियां समुदाय के लोगों को इतना परेशान किया जाए कि वे राज्य छोड़ने को मजबूर हो जाएं। इस तरह के बयान वो केवल असम में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में घूमघूम कर देते हैं। उन्होंने तो एक वीडियो तक वायरल कर दिया था जिसमें वो मुसलमानों को निशाना बनाकर नजदीक से फायर कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मुसलमानों के खिलाफ अपने बुलडोजर अभियान के लिए मशहूर हैं। उनका बुलडोजर अभियान बीजेपी सरकारों में इतना लोकप्रिय हुआ है कि दूसरे राज्यों की बीजेपी सरकारों ने भी इसे अपना लिया है। इस मामले में वे सुप्रीम कोर्ट की भी नहीं सुनते। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक और न्यायिक मामलों में बिना न्यायपालिका की अनुमति के बुलडोजर के प्रयोग पर पाबंदी लगा रखी है लेकिन इन नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट को भी उसकी औकात दिखा रखी है। बीजेपी और संघ के ऐसे ढेरों नेता हैं जिन्हें आप मुसलमानों के खिलाफ आग उगलते देख सकते हैं। खुद मोहन भागवत मुसलमानों के खिलाफ बयान देने में पीछे नहीं रहते थे। लेकिन अमेरिका में इन्होंने मुसलमानों के पक्ष में गजब का “ यू टर्न “ लिया। उन्होंने कहा कि जो हिंदू कहता है कि देश में मुसलमानों को देश में नहीं रहना चाहिए वह असल में हिंदू नहीं है। अगर कोई यह सोचता है कि भारत में मुसलमानों के लिए कोई जगह नहीं है या उन्हें देश से बाहर कर देना चाहिए तो वह व्यक्ति हिंदू ही नहीं रहता। उन्होंने और आगे बढ़कर कहा कि हिंदुत्व का मतलब किसी को बाहर निकालना नहीं है, बल्कि सभी की गरिमा और मानवता की एकता पर विश्वास करना है। आखिर ये मोहन भागवत को क्या हो गया ? सचमुच इनका हृदय परिवर्तन हो गया या कोई नया पैंतरा है ? अगर विचारों में परिवर्तन हो गया तो यह बात कहने के लिए उन्हें अमेरिका क्यों जाना पड़ा ? यह बात तो वो भारत के हिंदुओं के लिए कह रहे हैं तो ये बात तो देश में ही कह सकते थे। या भारत में जो कुछ मुसलमानों और दूसरे अल्पसंख्यकों के साथ हो रहा है और जिस तरह से वैश्विक समाज में भारत की आलोचना हो रही है, उसे दूर करने और दुनिया को दिखाने के लिए मोहन भागवत ने ये बयान दिया है ?

मोहन भागवत के अमेरिका में दिये गये बयान के कई मतलब हो सकते हैं। एक तीर से कई निशाना साधने वाली बात। कुछ बातें संघ और बीजेपी के नेता इस तरह से कहते हैं कि उनके कार्यकर्ताओं के लिए उसका संदेश अलग जाए और बाकी लोगों के लिए अलग। अब भागवत के इस बयान को ही देखिये। विदेश और देश के धर्म निरपेक्ष लोगों के साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी यह सोचने लगे हैं कि क्या सचमुच संघ और मोहन भागवत का हृदय परिवर्तन हो गया है, जबकि उनके कार्यकर्ताओं में यह संदेश है कि विदेशी धरती पर जाकर जो बोलना है, बोलते रहें। हम तो वही करेंगे जो पहले से करते आ रहे हैं। पहले भी तो यदा-कदा इस तरह के बयान आये ही। लेकिन क्या फर्क पड़ा। हमें किसी कार्य को करने से रोका गया ? हमारे खिलाफ कोई कार्रवाई की गई ? हमें पार्टी या संगठन से निकाला गया ? या सरकारी स्तर पर ही कोई कड़ी कार्रवाई की गई ? इस तरह का खेल अपने प्रधानमंत्री भी खेलते हैं। देश में मुसलमानों से एक दूरी बनाकर रखते हैं। मस्जिद की तरफ से गुजरते तक नहीं, रोजा इफ्तार की कौन कहे। लेकिन जब मुस्लिम देशों में जाते हैं तो वहां के राष्ट्राध्यक्षों से गले मिलते हैं। उनकी मस्जिदों में जाते हैं। उनके साथ खाते-पीते हैं। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के साथ तो इतना याराना था कि उनके यहां बिना बुलाये भी बिरियानी खाने पहुंच जाते थे। लेकिन क्या मजाल जो भारत में मुस्लिम विरोधी कारगुजारियों में लगे कार्यकर्ताओं की कभी उन्होंने निंदा भी की हो और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की हो।

मोहन भागवत ने अमेरिका में एक और महत्वपूर्ण बात भी कही है। उन्होंने शायद किसी एक पत्रकार या पत्रकारों के दल से कहा कि आप बीजेपी को जिताओ हम मोदी को बदल देंगे और उनकी जगह पर योगी आदित्यनाथ को प्रधानमंत्री बनायेंगे। इस आशय की एक खबर अमेरिका के एक अखबार में छपी है। यह बेहद महत्वपूर्ण बात है। दरअसल भागवत भी देख रहे हैं कि देश में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ काफी गुस्सा है। उनके रहते अब बीजपी 2029 में सत्ता में नहीं आ सकती। इसलिए वे “ गोल पोस्ट “ बदल रहे हैं। वे चाहते हैं कि लोगों का गुस्सा सिर्फ मोदी तक ही रहे। बीजेपी और संघ तक न पहुंचे। लेकिन वे यह नहीं जानते कि पिछले 12 साल में संघ और मोदी ने जो कुछ किया है वह अक्षम्य है। लोगों का गुस्सा केवल मोदी के प्रति नहीं बल्कि पूरे संघ परिवार के खिलाफ है। बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महंगाई से लेकर राम मंदिर के चंदे और चढ़ावे की चोरी तक पूरे संघ परिवार ने बहुत बड़ा पाप किया है। देश के साथ, देश के लोगों के साथ, उनकी आस्था के साथ और भगवान के साथ भी। इसलिए भागवत कितना ही “ गोल पोस्ट “ बदलें लोग इस पूरे कुनबे को ही बदलने के पक्ष में हैं।

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