स्वप्नलोक और राक्षस बकुल: डॉ स्वाति चौधरी

स्वप्नलोक, जो न तो आकाश में था, न पृथ्वी पर, बल्कि दोनों के बीच एक विशिष्ट और अदृश्य स्थान था। एक रहस्यमय संसार! वहाँ न कोई ध्वनि थी, न कोई हलचल, बस मौन की एक अदृश्य परत थी; जिस पर सोने वालों के ख़्वाब तैरते। जो इस लोक में पहुँचता, वह साकार रूप में नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं, आशाओं और दुराग्रहों के रूप में वहाँ वास करता।


स्वप्नलोक का प्रधान, 'राक्षस बकुल' (जिसे स्वयं के अनुसार ‘स्वप्नराज’ कहा जाता।), एक अत्यन्त कुटिल, चालाक और हर किसी को भ्रमित करने में माहिर था। उसकी आँखों में अदृश्य घृणा और मुख पर मुस्कान की एक निहायत ही कुटिलता छुपी-छुपी विचरण करती। वह अपने छोटे से राज्य में बुरी तरह से सम्राट बन चुका था और उसका हर क़दम एक साजिश के तहत होता।


एक दिन, स्वप्नलोक के आकाश में एक नया पात्र आया – 'विक्रम', एक युवक, जो अद्भुत रूप से पूर्ण और सही कार्य करने की आदत से अभिभूत था। विक्रम की आँखों में उत्साह, मन में उद्देश्य और दिल में नैतिकता का अडिग विश्वास बसता। उसकी उपस्थिति ने स्वप्नलोक में हलचल मचा दी, क्योंकि यह ऐसा स्थान था; जहाँ नैतिकता केवल विलासिता होती थी, न कि कोई वास्तविकता।


विक्रम ने बकुल से पूछा, "क्या यह स्वप्नलोक है? जहाँ लोग अपनी इच्छाओं और ख़्वाबों में खो जाते हैं?"


बकुल ने अपनी आँखों को चंचलता से घुमाते हुए कहा, "हाँ, यह स्वप्नलोक है, और यहाँ हम केवल ख्वाबों में ही सचाई तलाशते हैं। जो यहाँ आ जाता है, वही यहाँ का सत्य बन जाता है। तुम यहाँ अपने ख़्वाबों को जी सकते हो, बशर्ते तुम्हारा ख़्वाब स्वप्नराज से मेल खाता हो!"


विक्रम ने माथे पर अँगुलियाँ रखी और कहा, "परंतु बकुल, क्या तुम नहीं समझते कि ख़्वाबों में ही सत्य खोजने से कुछ नहीं होगा? सत्य को जीने के लिए, हमें कर्म करना पड़ता है। इस स्वप्नलोक में तुम क्या सिखा रहे हो? सिर्फ़ आराम और बेपरवाही? तुम्हारे ख़्वाबों में कोई दिशा नहीं है!"


बकुल हँसा और फिर एक दीर्घ और चिचियाती आवाज़ में बोला, "दिशा! दिशा! तुम क्या जानते हो, विक्रम? दिशा केवल वही होती है जो किसी को एक गहरी नींद में सही लगती है! यहाँ, हम ख़्वाबों में उसी दिशा का अनुसरण करते हैं, जो हमारे भीतर से निकलती है। तुम जिस दिशा की बात कर रहे हो, वह बस एक धुँधला-सा भ्रम है, जो तुमने अपने जागते जीवन में बना रखा है।"


विक्रम ने गहरी श्वास ली और फिर कहा, "लेकिन बकुल, क्या तुम यह नहीं समझते कि ख्वाबों में खो जाने से तुम अपने अस्तित्व को खो दोगे? स्वप्नलोक में कोई परिश्रम नहीं, कोई संघर्ष नहीं, और कोई उद्देश्य नहीं! तुमने अपने ख्वाबों में आराम करने को ही सर्वोत्तम मान लिया है, परंतु तुम भूल रहे हो कि बिना संघर्ष के जीवन केवल एक निरर्थक यात्रा है।"


बकुल के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ गयी और वह बोला, "अरे भाई, तुम क्या समझते हो? संघर्ष करने के नाम पर तुम यहाँ अपनी ताक़त को नष्ट करोगे। मेरे यहाँ ख़्वाबों का साम्राज्य है, और यहाँ संघर्ष के लिए कोई स्थान नहीं। यहाँ लोग आराम करते हैं, बिना किसी चिंता के जीते हैं। स्वप्नलोक में परिश्रम केवल उन लोगों के लिए है, जो अपने ख़्वाबों में भी मेहनत करना चाहते हैं। हम तो केवल मस्ती और शांति में विश्वास करते हैं।"


विक्रम ने सिर झुकाया और कहा, "परंतु, मैं जानता हूँ, कि जीवन की असली सफलता केवल सोने में नहीं, बल्कि जागने में होती है। मैं तुम्हारे स्वप्नलोक में इस बुराई को चुनौती देने आया हूँ।"


बकुल ने एक नाटकीय ढंग से कहा, "चुनौती! तुम मेरे साम्राज्य में चुनौती देने आए हो? तुम क्या समझते हो, विक्रम, कि तुम किसी अजेय योद्धा हो? यहाँ कोई युद्ध नहीं होते, कोई शौर्य नहीं होता, और सबसे बढ़कर – कोई जीत भी नहीं होती! यहाँ केवल एक ही नियम है – सोने वालों को अपने ख़्वाबों में राज करना होता है। तुम्हारी तरह संघर्ष करने वाले लोग, मेरे लिए केवल हास्य का कारण होते हैं। तुम क्या करोगे, विक्रम? यहाँ के सपने तुम्हारी सच्चाई को लील लेंगे!"


विक्रम ने अपनी आँखें तिरछी कीं और कहा, "तुम शायद यह भूल रहे हो, बकुल, कि सपने केवल उस समय तक राज करते हैं, जब तक इन्सान जागता नहीं और अब मैं जगाने आ रहा हूँ!"


यह कहकर विक्रम ने अपनी आँखें पूरी तरह से खोलीं और बकुल की घृणित मुस्कान को चुनौती दी। उसकी ऊर्जा में एक अदृश्य शक्ति प्रकट हुई, जो स्वप्नलोक की नींव को हिला देने वाली थी। बकुल का चेहरा पल भर के लिए अवाक हो गया। वह जानता था, कि विक्रम जैसे व्यक्ति को ख़्वाबों में खोने का कोई तरीक़ा उसके पास नहीं था।


बकुल ने अपने मंत्रियों को आदेश दिया, कि विक्रम को स्वप्नलोक से बाहर किया जाए, लेकिन विक्रम के अडिग आत्मविश्वास ने उसे और उसके साम्राज्य को भी झकझोर दिया। विक्रम का संघर्ष स्वप्नलोक की नींव से टकराया और यह सिद्ध हो गया, कि जब तक कोई जागरूक व्यक्ति अपने उद्देश्य के प्रति सच्चा रहता है, वह किसी भी ख़्वाब या स्वप्नराज के धूर्त जाल में नहीं फँस सकता।

©️ #drswatichoudhary

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