दिनेश लखनपाल

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दिनेश लखनपाल

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kavita

ज़हर को और ज़हरीला बनाने में वो माहिर है...

उसे देखा है, झेला है, बदन पर आजमाया है वही क़ातिल है जो तफ्तीश करने घर में आया हैबहुत शातिर है वो, उस्ताद है अपने हुनर में वो, वो बनता है बड़ा अपना, हक़ीक़त में पराया हैउसे आता है बातों से लुभाना, चाह...