हिंदी के महान गीतकार गोपालदास नीरज की याद में कवि सम्मेलन व "नीरज रत्न" संग्रह का भव्य लोकार्पण
नई दिल्ली (मुक्तिदीप) द्वारका सेक्टर-12 स्थित गैलार्ड टावर में रविवार को गोपालदास नीरज साहित्य समूह के बैनर तले भव्य कवि सम्मेलन एवं पुस्तक लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया।
साहित्य, कविता और राष्ट्रभावना से ओत-प्रोत इस कार्यक्रम में कार्यक्रम की अध्यक्षता उपन्यासकार एवं प्रोफेसर विकास शर्मा ने की। राष्ट्रवादी कवि अर्जुन सिसोदिया एवं साहित्यप्रेमी ऋषि कुमार शर्मा मुख्य अतिथि रहे।
समारोह में दो महत्वपूर्ण पुस्तकों का भव्य लोकार्पण किया गया। इनमें मंच के अध्यक्ष एवं श्रृंगार रस के सशक्त हस्ताक्षर अशोक भारद्वाज तथा मंच की सचिव एवं कवयित्री रचना भारद्वाज की पुस्तक ‘जो ख़ुद पे गुज़री है’ तथा मंच के कार्यकारिणी सदस्यों के साझा काव्य-संग्रह ‘नीरज रत्न’ का लोकार्पण प्रमुख रहा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रो. विकास शर्मा ने ‘जो ख़ुद पे गुज़री है’ पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि ऐसी रचनात्मक और संवेदनशील पुस्तकें ही हिंदी साहित्य को निरंतर समृद्ध करती हैं। उन्होंने कहा, “मैंने इस पुस्तक की सभी रचनाओं को भली-भांति पढ़ा है। इसकी प्रत्येक रचना में जीवन का अनुभव, आदर्श और प्रेरणा दिखाई देती है। पुस्तक पाठकों को संवेदना के साथ-साथ जीवन को देखने की नई दृष्टि भी प्रदान करती है।” उनकी प्रेरक साहित्यिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम को विशेष ऊँचाई प्रदान की।
मुख्य अतिथि ऋषि कुमार शर्मा ने मंच के सभी सदस्यों को साधुवाद देते हुए कहा, “गोपालदास नीरज साहित्य समूह के सदस्यों ने जिस साहित्यिक प्रतिबद्धता के साथ ‘नीरज रत्न’ जैसे सुंदर साझा संग्रह का प्रकाशन कराया है, वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय है। साहित्यकारों का ऐसा सामूहिक प्रयास हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य करता है। इतने भव्य और उत्कृष्ट साहित्यिक आयोजन का हिस्सा बनना मेरे लिए गौरव की बात है।”
राष्ट्रवाद के सशक्त हस्ताक्षर एवं मुख्य अतिथि अर्जुन सिसोदिया ने देश के अमर शहीदों और बलिदानियों को नमन करते हुए अपने ओजपूर्ण मुक्तकों से सभागार को रोमांचित कर दिया। उन्होंने विशेष रूप से वीर अब्दुल हमीद सहित देश के वीर सपूतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपनी छंदबद्ध रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने कहा, “जिस राष्ट्र की मिट्टी में बलिदानियों के रक्त की सुगंध बसी हो, उस राष्ट्र के कवि का दायित्व है कि वह अपनी कविता के माध्यम से देशभक्ति, स्वाभिमान और राष्ट्रचेतना को जन-जन तक पहुँचाए।”
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. संजय जैन ने अपने प्रभावशाली मुक्तकों से साहित्यिक वातावरण को और अधिक जीवंत बना दिया। उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने खूब सराहा।कार्यक्रम का कुशल संचालन देश की जानी-मानी दोहाकार डॉ. वर्षा सिंह ने किया।
कवि सम्मेलन में मंच के अध्यक्ष अशोक भारद्वाज, सचिव रचना भारद्वाज, डॉ. नाथूलाल लोटवाड़ा, कोषाध्यक्ष एवं ग़ज़लकार जयसिंह जीत, गीता राघव, सीमा वत्स, यशस्वी गीतकारा सीमा रंगा इंद्रा, अदिति अस्थाना, गायत्री खंडेलवाल सहित अनेक रचनाकारों ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से समां बांधा। युवा कवि आयुष भारद्वाज ‘फिलॉसफर स्टोन’ की हिंदी-अंग्रेजी मिश्रित कविता ने भी श्रोताओं को विशेष रूप से आकर्षित किया।
कार्यक्रम में प्रस्तुत कविताओं में श्रृंगार, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाओं और जीवन-दर्शन के विविध रंग देखने को मिले। मंच के सदस्यों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर तक बाँधे रखा और कई प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
समारोह ने एक ओर हिंदी साहित्य की सृजनात्मक परंपरा को मजबूती प्रदान की, वहीं दूसरी ओर पुस्तक प्रकाशन और सामूहिक साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से नए रचनाकारों को मंच देने का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। कार्यक्रम साहित्य, राष्ट्रभावना और काव्य-संवेदना के सुंदर संगम के रूप में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।
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