कहानी: "पराया धन'
फिर वही सुबह। वही रोज़-रोज़ के काम। उठो, झाडू, पोछा, बर्तन, चाय-नाश्ता, स्कूल जाने वाले भाई-बहनों का लंच पैक। फिर पापा का ऑफिस टिफिन। मम्मी ने धीरे-धीरे सारे घरेलू कार्य अब मेरे ऊपर छोड़ दिए हैं। मम्म...
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सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर उत्तर प्रदेश सरकार में कार्यरत
लेखक श्री बख्तावर हनीफ़ के दो कहानी संग्रह' हिजाब वाली लड़की," मेरे बचपन के राम प्रकाशित एवं चालीस से अधिक कहानियां, व्यंग्य , लेख विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके है।
3 articles · writing since July 2026
फिर वही सुबह। वही रोज़-रोज़ के काम। उठो, झाडू, पोछा, बर्तन, चाय-नाश्ता, स्कूल जाने वाले भाई-बहनों का लंच पैक। फिर पापा का ऑफिस टिफिन। मम्मी ने धीरे-धीरे सारे घरेलू कार्य अब मेरे ऊपर छोड़ दिए हैं। मम्म...
By बख्तावर हनीफ़ · 1 September 2026
बख़्तावर हनीफ़"प्रेम " एक एहसासतुम इतनी प्रेम से भरी होमुझे तब पता चलता हैजब तुम अनवरत पूछती होकहां आ गये ,कितनी देर और लगेगी ।तुम इतनी प्रेम से भरी हो ,मुझे तब पता चलता हैजब पूछती हो , खाना खा लियाखान...
By बख्तावर हनीफ़ · 2 August 2026
अरे भाई हमेशा नकारात्मक बात करते हो साबिर मियां, कभी इस मुंह से अच्छी बात भी निकाल दिया करो, क्यों जहर भरते हो इन नौजवानों के दिमाग में? जब पढ़ेंगे लिखेंगे तब ही तो आगे बढ़ेंगे। नसीम भाई ने सब के सामन...
By बख्तावर हनीफ़ · 27 July 2026