श्री रवि अरोड़ा

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श्री रवि अरोड़ा

श्री रवि अरोड़ा गाज़ियाबाद के एक अत्यंत प्रतिष्ठित और वरिष्ठ स्वतंत्र पत्रकार, संपादक व लेखक हैं। उन्होंने दशकों से हिंदी पत्रकारिता और समकालीन राजनीति पर अपनी पैनी और निष्पक्ष टिप्पणियों के माध्यम से समाज में एक विशिष्ट पहचान बनाई है।

11 articles · writing since August 2026

राहुल गांधी होने का अर्थ : रवि अरोड़ा

नीदरलैंड की राजधानी एम्स्टर्डम के एक मॉल के बाहर एक छोटी बच्ची असहाय लोगों के सहायतार्थ फूल बेच रही थी। वह बच्ची मॉल में आते जाते हर व्यक्ति से फूल खरीदने का अनुरोध कर रही थी मगर लोग बाग़ उसे नो थैंक्स...

यह डर कुछ कहता है : रवि अरोड़ा

युवा प्रदर्शनकारियों से डर कर पूरी दिल्ली को बंधक बना लिए जाने को बेशक आप कुछ भी नाम दें मगर दुनिया भर में इसे ' डर ' की संज्ञा दी जा रही है। डर का ऐसा सरकारी रूप कम से कम दिल्ली ने तो कभी नहीं देखा थ...

सीन में अब बड़े खिलाड़ी की एंट्री: रवि अरोड़ा

बसपा कार्यकर्ता आर एन आर्य उत्तर प्रदेश से राज्य सभा के सदस्य थे । उनका कार्यकाल 1996 से 2002 तक रहा। पार्टी के गाज़ियाबाद कार्यालय में वे आए दिन आ बैठते थे और चूंकि मेरा घर बसपा कार्यालय के बिल्कुल प...

लोकतंत्र आगे आगे - मतदाता पीछे पीछे: रवि अरोड़ा

लीजिए यह खबर आप तक पहुंचा ही दी गई कि चुनाव आयोग में अब सबकुछ ठीक हो गया है और विवाद के मेले में बिछड़े तीनों चुनाव आयुक्त फिर एक बार फिल्मी स्टाइल में गले मिल चुके हैं । मगर क्या वाकई आयोग में अब सब क...

उभरता ग्रेटर पीर बुखारा: रवि अरोड़ा

यह बात अगस्त 1990 की है। तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह नीत जनता दल सरकार द्वारा मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने के खिलाफ देश भर के छात्र आंदोलनरत थे और अनेक छात्रों ने आत्मदाह तक कर लिया था । इसी त...

दुनिया भविष्य में, हम अतीत में: रवि अरोड़ा

पंजाबी की कहावत है ' ना मैं गिनी, ना मेरे घट्टे ' यानी जब तक हमनें अपनी जेब के सिक्के गिनें ही नहीं तब तक वे भला कम ही कैसे होंगे । कुछ यही हाल आजकल हमारा है। पूरी दुनिया में कोहराम मचा है कि आर्टिफीश...

निभाया नहीं केवल माना जा रहा है धर्म: रवि अरोड़ा

हो सकता है कि धर्म किसी के लिए केवल आस्था का विषय हो मगर दर हक़ीक़त यह है कि धर्म हमारी संस्कृति, सामाजिक जीवन और सामूहिक स्मृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है । इसी रौशनी में जब हम देखते हैं कि मुल्क में...

अजब तेरी कारीगरी रे सरकार: रवि अरोड़ा

बात ज्यादा पुरानी नहीं है। आईसीआईसीआई बैंक का क्रेडिट कार्ड अपनी पर्स में रखता था। एक बार मासिक बिल आया 2307 रुपए । मैने लमसम तेईस सौ रुपए तो जमा कर दिए मगर सात रुपए यह सोच कर छोड़ दिए कि अगले महीने क...

भूखे वंदे मातरम् न होत गोपाला : रवि अरोड़ा

◆रवि अरोड़ा अजब तमाशा है। जनता जनार्दन महंगाई के बोझ तले मरी जा रही है और सरकार वंदे मातरम् का राग अलाप रही है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल भी कहां महंगाई को विमर्श के केंद्र में लाने देना चाहते हैं...

कुछ बातें लफ्फाजी के पार

◆ रवि अरोड़ा बचपन गरीबी में बीता। शायद आपका भी । जब देश ही गरीब था तो हम आप कैसे अमीर होते । आज आसपास बिखरी हुईं तमाम सुविधाएं तब नहीं थीं। आज़ादी के 80वें वर्ष में प्रवेश करते समय कम से कम इस विकास प...

कांवड़ यात्रा: क्या केवल आस्था का विस्तार !

◆ रवि अरोड़ासावन का महीना है और सड़कों पर जहां तक निगाह डालो भगवा रंग ही दिखाई दे रहा है। हरिद्वार से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और बिहार तक सड़कों पर कांवड़ियों की भीड़, उनक...