ऐपैक्स कला दीर्घा में कला प्रदर्शनी ने बिखेरे रचनात्मकता के विविध रंग,विनय विक्रम की म्यूरल कृतिया विशेष आकर्षण का केंद्र

ई दिल्ली (मुक्तिदीप) जीवन की निरंतर गति, संवेदनाओं और मानवीय अनुभवों को कला के विभिन्न माध्यमों में अभिव्यक्त करने वाली समूह कला प्रदर्शनी ‘प्रवाह जीवन के प्रवाह का उत्सव’ इन दिनों नई दिल्ली की एपेक्स दीर्घा रफी मार्ग में दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रही है। पंकज निगम द्वारा क्यूरेट की गई इस प्रदर्शनी में चित्रकला, मूर्तिकला और फोटोग्राफी की विविध एवं रचनात्मक कृतियों को एक साथ प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी का आयोजन 4 से 10 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है।

बुधवार को पूर्व उपसचिव, हिंदी अकादमी, दिल्ली ऋषि कुमार शर्मा ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कलाकारों की रचनाओं को सराहते हुए कहा कि “प्रवाह केवल एक प्रदर्शनी का नाम नहीं, बल्कि जीवन की निरंतर गति और उसकी विविध अनुभूतियों को समझने का एक रचनात्मक प्रयास है। यहां प्रदर्शित चित्रों, मूर्तियों और छायाचित्रों में कलाकारों ने अपने-अपने अनुभव और दृष्टिकोण को बड़ी संवेदनशीलता के साथ अभिव्यक्त किया है।प्रदर्शनी मनुष्य को केवल सुंदरता का अनुभव नहीं कराती, बल्कि उसे सोचने और महसूस करने के लिए भी प्रेरित करती है। इस प्रदर्शनी में मुझे यही विशेषता दिखाई दी। कलाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन के अनेक पक्षों को सामने रखा है। ऐसी प्रदर्शनियां कला और समाज के बीच संवाद स्थापित करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।”

उन्होंने प्रदर्शनी के क्यूरेटर पंकज निगम के प्रयासों की भी प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि विशेष रूप से युवा और उभरते कलाकारों को ऐसे मंच मिलना आवश्यक है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी रचनात्मक प्रतिभा को दर्शकों तक पहुंचाने और कला-जगत में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलता है।

‘प्रवाह’ प्रदर्शनी में कला की विविध विधाओं का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। चित्रों के रंग, मूर्तियों की संरचना और फोटोग्राफी के माध्यम से कलाकारों ने जीवन की गति, प्रकृति, संवेदना और मानवीय अनुभवों को अलग-अलग दृष्टिकोणों से प्रस्तुत किया है। प्रदर्शनी कला प्रेमियों, कलाकारों, विद्यार्थियों और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्रदर्शनी 10 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक दर्शकों के लिए खुली है।

प्रदर्शनी में अजय रावत के चित्रों ने भी दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। उनके चित्रों में विषय-वस्तु की प्रस्तुति, रंगों के प्रयोग और भावनात्मक गहराई को लेकर कला-प्रेमियों के बीच विशेष चर्चा रही। इसी प्रकार विनय विक्रम सिंह की म्यूरल कृतियों को भी दर्शकों ने खूब सराहा। उनकी रचनाओं में दिखाई देने वाली विशिष्ट कलात्मक उभार और प्रस्तुति ने प्रदर्शनी की विविधता को और समृद्ध किया।

अंडमान से आए कलाकार बासु कुमार के चित्र भी प्रदर्शनी के प्रमुख आकर्षणों में रहे। दूरस्थ भौगोलिक परिवेश से आने वाले बासु कुमार ने अपनी कृतियों में जिस तरह प्रकृति, परिवेश और अनुभूतियों को कलात्मक रूप दिया है, उसकी दर्शकों और कला-प्रेमियों ने विशेष सराहना की। उनकी रचनाओं में अलग परिवेश से उपजी संवेदनाओं की झलक दिखाई देती है, जो प्रदर्शनी को एक व्यापक भौगोलिक और सांस्कृतिक आयाम प्रदान करती है।

अजय रावत, विनय विक्रम सिंह और बासु कुमार सहित सभी कलाकारों की रचनात्मकता की सराहना करते हुए कहा कि देश के अलग-अलग क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों से आने वाले कलाकारों को एक साथ प्रस्तुत करना प्रदर्शनी की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे दर्शकों को कला की विविध शैलियों और दृष्टिकोणों को एक ही स्थान पर देखने-समझने का अवसर मिलता है।

उन्होंने प्रदर्शनी के क्यूरेटर पंकज निगम के प्रयासों की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि विभिन्न विधाओं के कलाकारों को एक मंच पर लाकर पंकज निगम ने कला की व्यापकता और विविधता को सामने रखने का सार्थक प्रयास किया है। ऐसी प्रदर्शनियां कलाकारों और दर्शकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने के साथ-साथ कला के प्रति समाज में रुचि और संवेदनशीलता विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

प्रदर्शनी में आदर्श मिश्रा, खुशबू शर्मा, प्रांजलि चौधरी, दीपक, पारुल कुमार, मनोजकुमार एम. साकले, आनंदा गुप्ता, सौरभ मजूमदार, अजब सिंह, सोनिया सरीन, संजीव कुमार सिन्हा, विनय कुमार, समीर मजूमदार, डिंपल चावला डांग, विकास बैजल, स्मिता घोष दत्ता, अजय रावत, डॉ. गुरदीप नागर, शीमिता वात्स्यायन, बासु कुमार, सेबी ऑगस्टीन, विनय विक्रम सिंह, जयन्ती बनर्जी, जैद और पंकज निगम सहित अनेक कलाकारों की रचनाएं शामिल हैं।

कुल मिलाकर ‘प्रवाह—जीवन के प्रवाह का उत्सव’ जीवन और कला के बीच संबंध को रेखांकित करने वाली एक महत्वपूर्ण सामूहिक प्रस्तुति के रूप में सामने आती है। अलग-अलग कलाकारों की अलग-अलग शैलियां, विषय और माध्यम मिलकर प्रदर्शनी को विविधता प्रदान करते हैं। विशेष रूप से अजय रावत, विनय विक्रम सिंह और अंडमान से आए बासु कुमार की कृतियों की सराहना ने प्रदर्शनी को और चर्चित बनाया है। 10 सितंबर तक चलने वाली यह प्रदर्शनी कला-प्रेमियों, कलाकारों, विद्यार्थियों और संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए देखने योग्य है।

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